पाठ्यपुस्तक में इतिहास को बदलने की कोशिश देश को नुकसान पहुंचा सकती है

Feb 06 2016 09:22 AM
पाठ्यपुस्तक में इतिहास को बदलने की कोशिश देश को नुकसान पहुंचा सकती है

मुम्बई: शरद पवार ने कहा पाठ्यक्रमों के इतिहास में देश को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। जिससे भारत पर आफत आ सकती है। सभी इतिहासकारों को एक साथ होने की अब जरूरत है ताकि देश के भविष्य पर कोई भी आंच न आ सके। और भारत को हिन्दू राष्ट्र की संज्ञा न दि जाये। शुक्रवार के दिन एक सेमिनार में राकांपा के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि आज के समय में बच्चो को स्कूलों में गलत शिक्षा दी जा रही है।

यह एक बहुत बड़े नुकसान में भारत को पहुंचा सकता है। स्कूलों के पाठ्यक्रमों में इतिहास के विषय में भारत को एक हिन्दू राष्ट्र के रूप में सम्बोधित किया जा रहा है। जिससे साफ-साफ नजर आ रहा है कि यहां पर इतिहास को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। जो भारत के लिए खतरनाक साबित होगा। क्योंकि यह देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को नुकसान पहुंचाएगा।

शरद पवार ने देश को बचाने के लिए कहा कि अब समय है कि भारत के इतिहासकारों को अब एक होने की जरूरत है। और इन्हे आलेख लिखे जाने कि आवश्यकता है। यह देश का बहुत बड़ा मुद्दा है जिस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।  इस मुद्दे पर तो बड़ी बहस होनी चाहिए। इसी इतिहास को लेकर कुछ लोग अफवाहें उड़ा रहें हैं।

कि शिवाजी महाराज मुस्लिम विरोधी थे। जोकि सरासर गलत है। बल्कि तथ्य यह है कि उन्होने तो अपनी सेना में मुस्लिमों को  बड़े-बड़ें पदों पर तैनात किया था। इसी प्रकार से इतिहास को काफी गलत तरीके से बता रहें हैं। जिससे यह धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता के लिए अच्छा नहीं है।

शरद पवार ने कहा कि मैं दो संस्थानों नेहरू विज्ञान केन्द्र और वाई बी चव्हाण केन्द्र में एक ट्रस्टी हूं। इतिहासकार नेहरू विज्ञान केन्द्र के मूलभूत ढांचे का उपयोग कर सकते हैं। तथा ऐसे प्रयासों के खिलाफ सामग्री प्रकाशित करने की जिम्मेदारी लें। इन सब कामों में मैं उनका साथ दूंगा। और हर प्रकार की सामग्री का वितरण किया जायेगा। बस इन सब के लिए सभी इतिहासकारों को एक होने कि जरूरत है। और एक ऐसी संस्था का निर्माण होना चाहिए जो पाठ्यक्रमों में गलती को पहचान कर सकें और उस पर कार्यवाही कर सके।