भाजपा के हाथ से फिसल रहे आदिवासी वोटर, क्या पीएम मोदी के धार दौरे से बदलेगा माहौल ?

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त से सबक लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकसभा चुनाव से ऐन पहले अपने किले को दुरुस्त करने में लगी हुई है. मध्य प्रदेश में दो दशक के बाद पहली बार आदिवासी वोट बैंक भाजपा की पकड़ से फिसल गया है. ऐसे में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है. ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी सूबे के धार में रैली के माध्यम से आदिवासियों को साधने के लिए आज उतर रहे हैं.

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मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की आबादी लगभग 23 प्रतिशत है. राज्य की कुल 29 लोकसभा सीटों में से छह लोकसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जिनमें शहडोल, मंडला, बैतूल, खरगोन, धार और रतलाम लोकसभा सीट शामिल है. 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी छह सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी, किन्तु रतलाम सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के हाथों से ये सीट छीन ली.

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मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाता भाजपा के परंपरागत मतदाता माने जाते थे, किन्तु हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस वोटबैंक में सेंधमारी में सफल रही है. अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों पर भाजपा को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. मध्य प्रदेश के मालवा से लेकर महाकौशल क्षेत्र तक में भाजपा को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था. ऐसे में अगर यही वोटिंग पैटर्न रहा तो 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए अपने गढ़ को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा.

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