Trai ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की फीस में की कमी, इस दिन से लागू होगी दर

Trai ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की फीस में की कमी, इस दिन से लागू होगी दर

भारत की सरकारी शाखा(TRAI) ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) को सस्ता कर दिया है. हालांकि, इससे सब्सक्राइबर्स को कुछ खास फायदा नहीं होने वाला, लेकिन देश के टेलिकॉम ऑपरेटर्स के लिए बड़ी राहत वाली खबर है. ट्राई ने हाल ही में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की नई कीमत 5.74 रुपये तय कर दी है. आइए जानते है पूरी ​जानकारी विस्तार से

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हाल ही सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार ट्राई ने कहा कि नई कीमत को सिस्टम में किए गए बदलावों के बाद तय किया गया है. यह कॉस्ट रीइंबर्समेंट पर आधारित है। ट्राई के चेयरमैन आर.एस. शर्मा ने कहा, 'मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी कॉस्ट रीइंबर्समेंट पर आधारित हैं और इन्हें इसी के हिसाब से जोड़ा गया है. मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की नई दरें 30 सितंबर से लागू हो जाएंगी.टेलिकॉम ऑपरेटर्स को हर मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन के लिए अलग-अलग एजेंसियों को भुगताम करना पड़ता है. ट्राई द्वारा तय की गई नई फीस के बाद अब टेलिकॉम ऑपरेटर्स को हर ट्रांजैक्शन में बचत होगी. टेलिकॉम ऑपरेटर्स को हर नए ग्राहक के लिए अभी 19 रुपये का भुगतान करना पड़ता है. ये पेमेंट मोबाइल नंबर सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी जैसे Syniverse Technologies और MNP Interconnection Telecom Solutions के खाते में जाता है.

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सालाना 75 करोड़ रुपये तक की बचत
ट्राई ने जो नई दर तय की है वह पिछली दर से 70% कम है। इससे टेलिकॉम कंपनियों को काफी फायदा होगा। नई दरों के लागू होने के बाद एयरटेल, वोडाफोन जैसी देश की दूसरी कंपनियों को भी सालाना 75 करोड़ रुपये तक की बचत होगी।


इसके अलावा इस मामले में ट्राई के चेयरमैन आर.एस शर्मा ने कहा, 'हमनें मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के तरीके में बदलाव किया है. पहले यह डोनर ऑपरेटर द्वारा जनरेट किए गए यूनीक पोर्टिंग कोड पर आधारित था जिसमें ऑपरेटर्स को अपने सब्सक्राइबर्स को बनाए रखने का एक ऑप्शन मिलता था. हालांकि इसमें उन्हें ज्यादातर सब्सक्राइबर्स रिजेक्ट ही करते थे.'इसके साथ ही दूसरी तरफ टेलिकॉम ऑपरेटर नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए एमएनपी कंपनियों को जितना भुगतान करती थीं, उसकी तुलना में वे सब्सक्राइबर्स से काफी कम पैसे लिया करती थीं. दूसरे ऑपरेटर्स पर माइग्रेट करने वाले सब्सक्राइबर्स को केवल एसएमएस के लिए ही चार्ज किया जाता था. यह 3 रुपये से 5 रुपये के बीच होता था. साथ ही, नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए कंपनियां एजेंसियों को इससे कहीं ज्यादा भुगतान करती थीं.

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एमएनपी को लेकर कानूनी पेंच सरकार ने इसी साल जनवरी में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की कीमत को 19 रुपये से घटाकर 4 रुपये कर दिया था. हालांकि, नई दरों के खिलाफ सिनिवर्स टेक्नॉलजी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में किए गए केस के बाद मार्च 2019 में सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था. इसके तीन महीने बाद यानी कि जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिलायंस ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर किया.इसमें दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को वापस लेने के लिए अपील की गई थी जिसमें मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की कीमतों को फिर से 19 रुपये कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एमएनपी एजेंसियों को तगड़ा झटका लगा था क्योंकि उन्हें फरवरी 2018 से जुड़ रहे पोर्टिंग फीस की बकाया राशि को टेलिकॉम ऑपरेटर्स से लेना था. यह बकाया राशि 120 करोड़ थी।जून 2019 में सर्विस प्रोवाइडर्स को 43 लाख पोर्टिंग रिक्वेस्ट मिले. मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की जब से शुरुआत हुई है तब से लेकर मई 2019 तक लगभग 43.7 करोड़ एमएनपी रिक्वेस्ट किए जा चुके हैं जो जून 2019 में 4.41 करोड़ के पार पहुंच गया है.

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