तन्हाई जब मुक्कदर में लिखी थी

न्हाई जब मुक्कदर में लिखी थी..
तो क्या शिकायत अपने, बेगाने से..!!
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हम मिट गए किसी की चाहत मैं..
वो बाज नहीं आते हमें आजमाने से..!!

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