इस तरह मिठाइयों में मिलावट होने का लगाया जा सकता है पता

भारत में दिवाली के त्यौहार नजदीक आने के साथ, लोग त्योहारों की तैयारियों के लिए बाजारों में जा रहे हैं। त्योहारों की तैयारी में वृद्धि के साथ मोतीचूर के लड्डू, काजू कतली, सून पापड़ी जैसी मिठाइयों की बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश में कई क्षेत्रों से बिक्री और मांग में वृद्धि के साथ मिलावट के कई मामले सामने आए। 

वही मिठाइयों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, कई विक्रेता मात्रा बढ़ाने और विनिर्माण लागत को कम करने के लिए मिलावट की ओर बढ़ते हैं। दूध, घी और सूखे मेवे मिठाई तैयार करने के लिए आवश्यक सबसे महत्वपूर्ण सामग्रियों में से हैं। घी के लिए पाम ऑयल, कंडेंस्ड मिल्क के लिए सिंथेटिक दूध ज्यादातर मिलावट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। कम लागत पर मात्रा बढ़ाने के लिए डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा और यूरिया जैसी हानिकारक सामग्रियों का उपयोग भी दुकानदारों द्वारा किया जाता है।

मिलावट खोजने के तरीके:
-बिना दानेदार बनावट के साथ मसला हुआ ताजा और बिना मिलावट का पनीर नरम लगता है।

-देसी घी की बनावट अरबी के समान है, जिसे अंग्रेजी में तारो रूट के रूप में जाना जाता है

-देसी घी ठोस नहीं होता है

-चांदी की पत्तियां छूने पर घुल जाती हैं और बेमिसाल पनीर का स्वाद बहुत मीठा हो जाता है

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