भारत पर मंडराया एक और प्रलय का खतरा! अलर्ट हुई सरकार

देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर केदारनाथ जैसी स्थिति बनती नजर आ रही हैं। यहां बागेश्वर जिले के कुंवारी गांव में 600 मीटर लंबी एक प्राकृतिक झील बन गई है। पुष्कर सिंह धामी सरकार इसको लेकर अलर्ट हो गई है। भूस्खलन के कारण शंभू नदी के ऊपरी हिस्से में यह झील बन गई है। खबर के अनुसार, यदि यह झील टूटती है तो तेज बहाव के साथ भारी मात्रा में पानी एवं मलबा फट आएगा, जो पिंडर नदी से मिलने के बाद और भी अधिक शक्तिशाली हो जाएगा। पिंडरी नदी नारायणबगड़ से होते हुए कर्णप्रयाग में अलकनंदा से आकर मिलती है।

खबर के अनुसार, इस प्राकृतिक झील के निर्माण ने बागेश्वर एवं चमोली को लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, झील यदि टूटती है तो चमोली के देवल, थराली एवं नारायणबगड़ ब्लॉकों में सबसे अधिक तबाही होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, 2013 से 2019 के बीच भूस्खलन की वजह से शंभू नदी पर मलबा जमा हो गया, जिससे झील का निर्माण हो गया। इसको लेकर प्रशासन परेशानी में है क्योंकि झील का आकार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया तो वर्षा से पहले या बाद में केदारनाथ जलप्रलय जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। जिला आपदा केंद्र ने 2012 में भूस्खलन की चेतावनी दी थी। उसी वर्ष जिला टीम ने गांव में प्राकृतिक ढांचे में दरारें देखी थीं। केंद्र ने कुंवारी गांव को लेकर अलर्ट भी जारी किया, क्योंकि इस इलाके में बार-बार भूस्खलन होता है। संकट को देखते हुए कपकोट तहसीलदार व उनकी टीम सर्वे के लिए मौके पर भेजी गई है। तहसीलदार ने कहा कि भूस्खलन से शंभू नदी में 60-70 मीटर लंबी 15-20 मीटर चौड़ी झील बन गई है। उन्होंने आगे बताया कि झील 600-700 मीटर लंबी है, जिसमें तकरीबन 6500 क्यूसेक पानी है। वहीं एडीएम बागेश्वर चंद्र सिंह इंफाल ने बताया, "भूवैज्ञानिकों, वन अफसरों एवं राजस्व विभाग की एक टीम ने नदी की रुकावट और समय पर की जाने वाली कार्रवाई के लिए झील का निरीक्षण किया है।

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