मैदान पर शानदार प्रदर्शन से दिल जीत लेने वाला खिलाड़ी अब कर रहा है यह काम

मिस्त्र का प्रसिद्ध प्रोफेशनल फुटबॉल खिलाड़ी महरौस महमूद कोरोना वायरस महामारी के चलते गली में खाने का सामान बेचने को विवश है. कभी मैदान पर पसीना बहाने वाला यह खिलाड़ी अब सड़क पर अलग ढंग से पसीना बहा रहा है. अगर स्थितियां सामान्य होतीं तो वर्ष के इस वक्त महमूद मिस्र के दूसरे डिवीजन के एक क्लब बेनी सूफ के लिए एक डिफेंडर के तौर पर मैदान पर खेल रहा होता. लेकिन अरब संसार के सबसे अधिक आबादी वाले देश के लाखों लोगों की तरह महमूद भी कोरोनो वायरस महामारी की चपेट में आ गया है.

इन दिनों महरौस महमूद ऊपरी मिस्त्र की एक भीड़ भरी बाजार में कार्य कर रहा है. वह एक पैनकेक जैसी पेस्ट्री (स्वीट डिश) तैयार बनाने का कार्य कर रहा है. यहां दुकान के स्टॉल के पास हलचल बहुत ज्यादा व और लोग कंधे से कंधा टकराते हुए चल रहे हैं. महामारी से पहले महमूद ने अपने क्लब के लिए खेलते हुए लगभग 200 डॉलर प्रति माह कमाए थे. यह उनके परिवार (जिसमें तीन लोग हैं) का पेट भरने का लंबे वक्त तक कार्य करता रहा, लेकिन उन्होंने परिवार को पालने के लिए इसके अतिरिक्त कुछ भाग टाइम नौकरियां भी की. मार्च के मध्य में लीग बंद हो गई व महमूद की कमाई का मुख्य जरिया भी समाप्त हो गया. मिस्र ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकारी कोशिश के तहत कर्फ्यू लगाया. कैफे, मॉल व अन्य दुकानें सभी को बंद कर दिया गया. उनके क्बल ने खिलाड़ियों को बोला कि जब तक खेल नहीं लौटता, वे घर पर ही रहें.

लेकिन यह महमूद या नील नदी क्षेत्र के कई अन्य लोगों के लिए एक विकल्प नहीं है. उनके परिवार को खाना चाहिए. महमूद ने कहा, ''अपने परिवार का पेट पालने के लिए मुझे किसी भी तरह का कार्य करना चाहिए.'' काहिरा के दक्षिण में 350 किलोमीटर (230 मील) की दूरी पर स्थित, मैनफालूट में मार्केट सारे महामारी में खुला हुआ है. रमजान के महीने में इस मार्केट की दुकानों में बहुत ज्यादा हलचल है.

महमूद जो छोटे पैन केन बना रहे हैं उन्हें अरबी में कतायफ कहते हैं. रमजान में यह मिठाई खासी लोकप्रिय होती है. देश का आंशिक लॉकडाउन लागू होने के बहुत ज्यादा समय बाद भी महमूद अपने गृहनगर लौट आए. उन्होंने नौकरियों की तलाश की, लेकिन केवल निर्माण कार्यों में दिहाड़ी मेहनतकश के रूप में कार्य पा सकते थे. संकट से पहले, उन्हें निर्माण स्थलों पर नियमित कार्य मिल सकता था. आमतौर पर एक दिन में 7 डॉलर से अधिक नहीं होता था. लेकिन अब वह कहते हैं कि वह भाग्यशाली होंगे यदि उन्हें हफ्ते में दो दिन भी कार्य मिल सकता है तो. इसके बाद रमजान आ गया व उन्हें मिठाई की दुकान पर कार्य मिल गया. मैनफालूट में अधिकांश लोग दिहाड़ी मेहनतकश हैं. घर पर रहना व सामाजिक दूरी बनाना व्यवहारिक नहीं है. मिस्र के ग्रामीण व गरीब हिस्सों में इस महामारी के खतरनाक रूप लिया है. वहां लोग बीमारी से ज्यादा उपचार को बदतर मानते हैं. 28 वर्ष के महमूद घर के बड़े बेटे हैं. उनके पिता भाग टाइम ड्राइवर थे, लेकिन दिल की बीमारी की वजह से रिटायर हो चुके हैं. वह अपने पिता, माता व भाई को सपोर्ट कर रहे हैं. महमूद का परिवार तीन मंजिला मकान के एक कमरे में रहता है. वह अपने चाचाओं के 6 परिवारों के साथ इस घर को शेयर कर रहे हैं.

कम आयु में ही महमूद का टैलेंट दिखने लगा था. उन्होंने एक लोकल क्लब में बतौर बॉक्सर आरंभ की. इसके बाद वह हैंडबॉल में चले गए. इसके बाद 16 वर्ष की आयु में वह प्रोफेशनल फुटबॉलर बन गए. निकनेम कॉमपनी के नाम से प्रसिद्ध महमूद ने कहा, कोच ने बोला कि मैं एक अच्छा डिफेंडर बन सकता हूं. महमदू लीवरपूल के डिफेंडर विर्जिल वान इजेक को अपना भूमिका मॉडल मानते हैं. महमूद ने अपनी टीम को लीग में टॉप में ले जाने में मदद की. इस बीच वह खतरों के बावजूद कार्य भी करते रहे. अगले महीन महमूद की विवाह होनी है. ऐसे में परिवार व विवाह के लिए उन्हें पैसों की आवश्यकता है. महमूद ने कहा, ''कोई भी इम्युन नहीं है. लेकिन मेरे जैसे व मेरे परिवार जैसे लोगों को जीना ही होगा.''

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