घर में नहीं पुतवाना चाहिए ये कलर, आती है नकारात्मकता

घर में नहीं पुतवाना चाहिए ये कलर, आती है नकारात्मकता
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दीवारों का रंग व्यक्ति के जीवन की सकारात्मकता या नकारात्मकता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। सही रंगों का चयन न केवल घर की सुंदरता को बढ़ाता है बल्कि सुख, समृद्धि और खुशहाली को भी बढ़ावा देता है। ऐसा माना जाता है कि कुछ रंग सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं जबकि अन्य नकारात्मकता को बढ़ा सकते हैं, इसलिए अपने घर को रंगते समय वास्तु सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है। 

पूजा कक्ष: वास्तु के अनुसार पूजा कक्ष का रंग आदर्श रूप से पीला, हल्का नीला या नारंगी होना चाहिए। ये रंग घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुविधाजनक बनाते हैं। पूजा कक्ष में काले रंग का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। 
रसोई: वास्तु सिद्धांतों के अनुसार रसोई के लिए लाल, नारंगी या हरा रंग शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ये रंग घर में समृद्धि और प्रचुरता को बढ़ावा देते हैं। 
बाथरूम: वास्तु के अनुसार बाथरूम की दीवारों के लिए सफेद रंग की सिफारिश की जाती है। यह रंग स्वच्छता और पवित्रता से जुड़ा है। 
बेडरूम: सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन के लिए, बेडरूम को गुलाबी, हल्के नीले या हल्के हरे रंग जैसे रंगों में रंगा जा सकता है। ये रंग सुखदायक और आराम के लिए अनुकूल होते हैं।
अतिथि कक्ष: वास्तु के अनुसार अतिथि कक्ष को आदर्श रूप से सफेद, ऑफ-व्हाइट या हल्के पीले रंग में रंगा जाना चाहिए। ये रंग मेहमानों के लिए स्वागत करने वाला माहौल बनाते हैं।
अध्ययन कक्ष: अध्ययन कक्ष के लिए लाल, गुलाबी, नीला और हरा जैसे रंग उपयुक्त हैं क्योंकि माना जाता है कि ये एकाग्रता और सकारात्मकता बढ़ाते हैं, जिससे बच्चों के बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन में सहायता मिलती है।
भोजन कक्ष: वास्तु के अनुसार भोजन कक्ष के लिए हल्के हरे, नीले या गुलाबी रंगों की सिफारिश की जाती है। ये रंग सकारात्मक ऊर्जा को उत्तेजित करते हैं और भोजन का सुखद अनुभव बनाते हैं।

दिशात्मक रंग:
उत्तर की दीवार: हल्के हरे रंग की सिफारिश की जाती है क्योंकि यह धन के प्रवाह को बढ़ाता है।
उत्तर पूर्व दिशा: हल्के नीले रंग का उपयोग किया जा सकता है।
पूर्व दिशा: सफेद रंग उपयुक्त है।
दक्षिण पूर्व दिशा: गुलाबी या नारंगी रंग अग्नि से जुड़े होने के कारण शुभ होते हैं।
दक्षिण दिशा: लाल रंग उपयुक्त माना जाता है।
पश्चिम दिशा: इस दिशा के लिए वास्तु में नीला रंग पसंद किया जाता है।

इन दिशा-निर्देशों का पालन करके, कोई भी व्यक्ति अपने घर के भीतर एक सामंजस्यपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बना सकता है, जिससे समग्र कल्याण और समृद्धि को बढ़ावा मिलता है। वास्तु सिद्धांत रंगों के उपयोग के माध्यम से रहने की जगहों के भीतर ऊर्जाओं को सामंजस्य बनाने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जिससे न केवल सौंदर्य अपील सुनिश्चित होती है, बल्कि निवासियों के लिए एक पोषण वातावरण भी सुनिश्चित होता है।

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