ये कारण होते है रिश्तों की डोर टूटने के..

May 17 2015 02:41 AM
ये कारण होते है रिश्तों की डोर टूटने के..

अक्सर प्यार के मामले में किसी ना किसी कारण से नोक-झोक चलती रहती है और एक बढ़ी लड़ाई का रूप ले लेती है।  रिश्तों की उलझनों को समय रहते सुलझा लेना चाहिए ताकि आपकी जिंदगी की गाडी पटरी पर चलती रहे। पिछले कुछ समय से हमारे देश में शादियां ट्टने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर जन्म-जन्मांतरों तक साथ रहने की कसमें खाने वाले जीवनसाथी आखिर क्यों अपनी शादी निभा नहीं पाते। कुछ स्थितियों के कारण आपकी शादीशुदा जिंदगी में परेशानियां खडी हो जाती हैं।  

हर बात पर अपने आप को सही ठहराना:- शादी टूटने का यें भी एक कारण हो सकता हैं कि आप अपनी हर बात को सही साबित करने का हर प्रयास करें और अंहकार में एक दूसरे की भावनाओं की कदर ही न करें और अपने लिए हुए हर फैसले को ही सही समझें।  

पुरानी बातों को कुरेदना:- शादीशुदा जिंदगी में अगर आप दोनों एक दूसरे की पुरानी बातों को कुरेदना शुरू कर देंगे या अपने ससुरालवालों को नीचा दिखाने के लिए एक दूसरे की गलतियां निकालनी शुरू कर देंगे ऎसा करने से आपकी शादीशुदा जिंदगी जल्दी खत्म होने की कदार पर आ पहुंचेंगी। 

झग़डा करने के बहाने ढूंढना:- अगर आप एक दूसरे को पसंद नही करते तो आप एक दूसरे से झगडा करने के बहाने ढूंढते रहते है और कई बार तो स्थिति ऎसी हो जाती हैं कि आप एक दूसरों को घर में बर्दाशत भी नही कर पाते।  

दोनों में से कोई एक दूसरे को धोखा दे रहा हो:-  अगर शादीशुदा जिंदगी में से कोई एक चाहें वो पति हो या पत्नी एक दूसरे को धोखा दे रहे हो तो शादीशुदा रिश्ते को टूटने से कोई नहीं बचा सकता।  

चुप्पी:- चुप्पी भी शादीशुदा रिश्तों के टूटने का कारण हो सकती हैं इसलिए अपने रिश्ते में बिल्कुल चुप्पी न रखें ऎसा करने से आपके मन की बात मन में ही रह जाती हैं जिससे रिश्तों में दरार आ जाती है।  

परिवार का हिस्सा न समझना:- अगर आपका पति या पत्नी दोनों में से कोई एक सिर्फ अपने बारे में ही सोचता रहता है और आपके घर में होने या न होने से कोई फर्क न पडना ऎसा करने से आपको अपने ही घर में अकेलापन महसूस होने लगेगा, ऎसा करने से आपका रिश्ता जल्दी खत्म हो सकता है। 

सेक्स के प्रति इच्छुक न होना:-  अगर दोनों में से कोई एक सेक्स के प्रति इच्छुक नहीं हैं तो अपने पार्टनर को मनाने का प्रयाल करना चाहिए और एक दूसरे की भावनाओं को समझते हुए एक दूसरे की पंसद का ध्यान रखना चाहिए।  

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