कम किया जा रहा 750000 मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर का वॉल्यूम, ताकि लोगों को न हो दिक्कत

जकार्ता: मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर अक्सर स्थानीय लोगों के लिए दिक्कतें पैदा करते हैं। ऐसे में बात जब इंडोनेशिया जैसे देश की हो जहाँ दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी रहती हैं और पूरे देश में 750,000 मस्जिदें हैं, तो सोचिए वहाँ का हाल क्या होगा। हाल में एक महिमा (बदला हुआ नाम) नामक महिला ने इसे लेकर मीडिया के सामने अपनी राय रखी है। 

महिला ने बताया है कि किस तरह मस्जिदों में 5 दफा लाउडस्पीकर बजने की वजह से उसे बीमारियों ने घेर लिया है। किन्तु काफी चाहने के बाद भी वो कुछ नहीं कर पाती। उसे डर है की उसे जेल में डाल दिया जाएगा, जैसा ईशनिंदा के अन्य अभियुक्तों के साथ किया जाता है। 
इंडोनेशिया की महिमा ने अपनी पहचान छिपाते हुए मीडिया को बताया कि उन्हें लाउडस्पीकरों से आने वाली आवाज के चलते रात में नींद नहीं आती और इसके कारण उन्हें एंजाइटी डिसॉर्डर हो गया है। वह कहती हैं कि तबीयत बिगड़ जाने के बाद भी वह इंडोनेशिया में कुछ नहीं बोल पाती थीं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उन्हें जेल में न डाल दिया जाए। 

बता दें कि मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर नमाज से 30-40 मिनट पहले बजने शुरू हो जाते हैं, ताकि लोग जग जाएँ। उनके अनुसार, 6 माह तक शोर झेलने के बाद अब वह आगे कुछ सहने की हालत में नहीं हैं। उनके लिए रातों में होने वाला ये खलल सेहत के लिहाज से बेहद हानिकारक है। उनका कहना है, 'मुझे नींद नहीं आती है और लगातार जागते रहने के बाद मुझे एंजाइटी होने लगी है। अब मैं कोशिश करती हूँ कि जितना हो सके खुद को थकाऊँ ताकि इस शोर में भी सो सकूँ।' हालांकि,  इंडोनेशिया मस्जिद काउंसिल को कुछ ऑनलाइन शिकायतें मिलने के बाद वहाँ के कर्मचारियों ने जकार्ता के मस्जिद की लाउडस्पीकर की आवाज को अडजस्ट करना शुरू कर दिया है, ताकि लोगों को अजान की आवाज शोर न लगे और उन्हें कोई समस्या न हो। 

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