दुश्मनो का आतंक ख़त्म करेगा अकेला आईएनएस विक्रांत

नई दिल्ली : आईएनएस विक्रांत के निर्माण के दौरान भारत ने रक्षा तकनीक में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की। भारत विश्व में बड़े युद्धपोत और हथियार बनाने में आत्मनिर्भर देश बन गया है। भारत के पास सिर्फ एक विमानवाहक पोत आईएनएस विराट ही है, जो 2018 तक नौसेना के बेड़े में रहेगा। भारत ने बुधवार को अपने पहले स्वदेशी विमान वाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को एक सादे समारोह में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड पर डॉक से बाहर निकाला। इसका निर्माण सीएसएल में किया गया है।

सीएसएल के अधिकारियों ने बताया कि इसमें अभी कई उपकरण लगाये जाएंगे। नौसेना में शामिल किए जाने से पहले इसे कई परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। इसके कई स्थतिक और गतिशील परीक्षण किएजाएंगे।बताते चलें कि इस पोत के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत विमान वाहक पोतों की डिजाइन एवं निर्माण करने वाले विश्व के चार देशों, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के समूह में शामिल हो जाएगा।स्वदेशी विमान वाहक की बुनियादी डिजाइन भारतीय नौसेना के डिजाइन निदेशालय ने तैयार की है।इसकी विस्तृत डिजाइन सीएसएल टीम ने बनाई है।

यह 40 हजार टन वजनी, 260 मीटर से लंबा और 60 मीटर चौड़ा है। इसमें उड़ान भरने वाले दो रनअप एवं उतरने की लैंडिंग स्ट्रिप है। इससे स्वदेशी एलसीए सहित कई विमान एवं विभिन्न हेलीकाप्टर उड़ान भर सकेंगे और उतर सकेंगे। समुद्र में चलता-फिरता लड़ाकू हवाई अड्‍डा विक्रांत का निर्माण पूरी तरह से भारत में हुआ है। अभी विश्व में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के पास ही यह युद्ध पोत की क्षमता है। युद्ध पोत की इसी ताकत की बदौलत अमेरिका ने दुनिया पर अपना दबदबा कायम रखा है।

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