पाकिस्तान में हुई उस दौड़ की कहानी जिसने बदल दी थी मिल्खा सिंह की जिंदगी

Jun 19 2021 02:04 PM
पाकिस्तान में हुई उस दौड़ की कहानी जिसने बदल दी थी मिल्खा सिंह की जिंदगी

कोरोना संकट के बीच देश ने कई कलाकारों को खोया है इस बीच एथलेटिक्स में भारत का नाम रोशन करने वाले मिल्खा सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया। भारत के महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह का एक माह तक कोरोना वायरस से जूझने के पश्चात् शुक्रवार को देहांत हो गया। पद्मश्री मिल्खा सिंह 91 वर्ष के थे, उनके परिवार में उनके बेटे गोल्फर जीव मिल्खा सिंह तथा तीन बेटियां हैं। इससे पूर्व उनकी बीवी एवं भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कैप्टन निर्मल कौर ने भी कोरोना वायरस की वजह से दम तोड़ दिया था।

मिल्खा सिंह 'फ्लाइंग सिख' के नाम से लोकप्रिय रहे। उनके इस नाम के पीछे की कहानी बहुत इंट्रेस्टिंग है। उन्होंने 2016 में इसका खुलासा किया था। दरअसल,1960 में मिल्खा को पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का न्योता प्राप्त हुआ था। मिल्खा देश बंटवारे के गम को नहीं भुला पा रहे थे, इसलिए वह पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे। तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू के समझाने पर वह पाकिस्तान जाने के लिए मान गए। पाकिस्तान में उस वक़्त अब्दुल खालिक की तूती बोलती थी तथा वहां के वह सबसे तेज धावक थे।

प्रतियोगिता के चलते तकरीबन 60000 पाकिस्तानी प्रशंसक अब्दुल खालिक का जोश बढ़ा रहे थे, मगर मिल्खा की गति के सामने खालिक टिक नहीं पाए थे। मिल्खा की जीत के पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' का नाम दिया। तथा इसके पश्चात् से वह फ्लाइंग सिख के नाम से छा गए। मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा (अब पाकिस्तान) में किसान परिवार में हुआ था। मगर वह अपने अपने मां-बाप की कुल 15 बच्चों में से एक थे। उनका परिवार विभाजन की त्रासदी का शिकार हो गया, उस के चलते उनके माता-पिता के साथ आठ भाई-बहन भी मारे गए। इस खतरनाक मंजर को देखने वाले मिल्खा सिंह पाकिस्तान से ट्रेन की महिला बोगी में छिपकर दिल्ली पहुंचे। 

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