मानव जीवन में आत्मबोध से ही है सुख की राह

आपके जीवन में यदि धन -दौलत , नौकरी-चाकरी, वस्तुओं आदि का भण्डार क्यों न भरा हो पर यदि आपके पास संतोष नहीं है तो आप कभी भी सुखद जीवन व्यतीत नहीं कर सकते. आपका यह मन यहां वहां भटकता रहेगा और आप हमेशा परेशान रहेंगें. आपके जीवन में शांति बहुत ही जरूरी है. शांति से ही परमानंद की प्राप्ति है और परमानन्द से ही सुख संभव है ।

मनुष्य में यदि संतोष की भावना जाग्रत हो जाए, तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं हो सकती। आत्मबोध प्राप्त कर लिया तो आपका जीवन सार्थक हो गया . आत्मबोध से ही स्वयं को समझने की शक्ति उसके जीवन को सार्थक बना देती है। आज इस संसार में जो बड़े बड़े साधू - संत हुए वे अपने इस आत्मबोध की वजह से इस स्थान तक पँहुचें .

आत्मबोध होता क्या है - स्वयं को जानना , अपने अंदर झाकना ,खुद से खुद को बदलना ही आत्मबोध से ही संभव है. इस आत्मबोध में बस यही प्रश्न उठते है. की मैं क्या हूं, में ऐसा क्यों हूं  और जो अपने मन से अपने आपको जान ले उसे आत्मबोध हो जाता है

यह आत्मबोध ही मानव उन्नति में सहायक है. यह आत्मबोध मानव की आंतरिक प्रवृति होती है और इसी आत्मबोध से ही मानव में तृष्णा को छोड़ , संतोष की भावना जाग्रत होती है. यह मानव का सबसे बड़ा ज्ञान है .

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