सर्दियों में बढ़ सकती है अस्‍थमा के रोगियों की संख्या, रखें कुछ बातों का ध्यान

Dec 07 2018 06:10 PM
सर्दियों में बढ़ सकती है अस्‍थमा के रोगियों की संख्या, रखें कुछ बातों का ध्यान

नई दिल्ली: अस्‍थमा एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी की सांस की नलियों में कुछ कारणों के प्रभाव से सूजन आ जाती है। जानकारी के अनुसार बता दें कि इस कारण रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। वहीं बता दें कि जिन कारणों से अस्‍थमा का प्रकोप बढ़ता है, उन्हें एलर्जन कहा जाता है। बता दें कि सर्दियों के मौसम की कुछ खूबियां हैं तो कुछ खामियां भी। इस मौसम में अस्‍थमा और कुछ विशेष प्रकार के संक्रमणों के मामले कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन कुछ सजगताएं बरतकर आप स्वस्थ रहते हुए इस मौसम का लुत्फ उठा सकते हैं...

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यहां बता दें कि अस्‍थमा फेफड़ों की एक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। श्वसन नली में सिकुड़न के चलते रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्‍याएं होने लगती हैं। लक्षणों के आधार अस्थमा के दो प्रकार होते हैं- बाहरी और आंतरिक अस्थमा। बाहरी अस्थमा बाहरी एलर्जन के प्रति एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जो कि पराग, जानवरों, धूल जैसे बाहरी एलर्जिक चीजों के कारण होता है। आंतरिक अस्थमा कुछ रासायनिक तत्वों को श्‍वसन द्वारा शरीर में प्रवेश होने से होता है जैसे कि सिगरेट का धुआं, पेंट वेपर्स आदि। आज विश्‍व अस्‍थमा दिवस पर हम आपको इस लेख में अस्‍थमा से जुड़ी समस्‍याओं और उपचार के बारे में बताएंगे।

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गौरतलब है कि अधिकतर लक्षणों के आधार पर मर्ज का निदान डायग्नोसिस किया जाता है। इसके अलावा कुछ परीक्षण करके जैसे सीने में आला लगाकर, म्यूजिकल साउंड रान्काई सुनकर और फेफड़े की कार्यक्षमता की जांच पी.ई.एफ.आर. और स्पाइरोमेट्री द्वारा की जाती है। अन्य जांचों में खून की जांच, सीने और पैरानेजल साइनस का एक्सरे कराया जाता है।

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