केरल का नाम 'केरलम' करने जा रही वामपंथी सरकार, उधर आबादी बढ़ने के साथ अलग राज्य की मांग उठाने लगे मुस्लिम संगठन !

केरल का नाम 'केरलम' करने जा रही वामपंथी सरकार, उधर आबादी बढ़ने के साथ अलग राज्य की मांग उठाने लगे मुस्लिम संगठन !
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कोच्ची: पिनाराई विजयन सरकार द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने की चर्चाओं के बीच एक बड़ी और हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, सूबे में सुन्नी युवाजन संगम के नेता मुस्तफा मुंडुपारा ने एक अलग मालाबार राज्य की माँग उठाई है। मुस्तफा ने मालाबार के स्कूलों में सीटों की कमी पर आयोजित एक प्रदर्शन में यह मांग उठाई। उन्होंने कहा कि दक्षिणी केरल और मालाबार के लोग बराबर टैक्स भरते हैं, तो उन्हें एक जैसी सुविधाएँ भी मिलनी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, मुस्तफा ने अपने बयान में कहा कि, 'जब हम दक्षिणी केरल और मालाबार में ऐसी नाइंसाफी देखते हैं और फिर यदि किसी हिस्से से अलग मालाबार राज्य की माँग उठेगी, तो हम उन्हें दोष नहीं दे पाएंगे। मालाबार के लोग और दक्षिणी केरल के लोग समान टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, तो हमें समान सुविधाएँ भी दी जानी चाहिए। इस माँग को अलगाववाद नहीं कहा जाना चाहिए। यदि, मालाबार एक राज्य बन ही जाए, तो फिर देश में क्या होगा।”

मुस्तफा मुंडुपरा के विवादित भाषण के बाद और वामपंथी सरकार द्वारा अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर केरल भाजपा इकाई के अध्यक्ष, के सुरेंद्रन ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयरन और विपक्ष के नेता सतीशन की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जिन्हें लगता है कि कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबन्ध लगाने से केरल में कट्टरपंथी ताकतें खत्म हो गई हैं, वह गलत हैं। अलग राज्य की माँग करना एक दुस्साहस है और इस मामले पर पिनराई विजयरन और सतीशन की चुप्पी ये बताती है कि राज्य में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियाँ कट्टरपंथियों के सामने घुटनों पर आ चुकी हैं। वोट बैंक के लिए वो (कांग्रेस और कम्युनिस्ट) बेशर्मी से राष्ट्रीय अखंडता के साथ समझौता कर रही हैं।

पहले भी उठ चुकी है अलग मुस्लिम राज्य की मांग:- 

बता दें कि पहली दफा नहीं है, जब मालाबार को केरल से अलग करने की बातें उठी हों, इससे पहले समस्त केरल सुन्नी स्टूडेंट फेडरेशन (SKSSF) ने 2021 में यह मुद्दा उठाया था। SKSSF के मुखपत्र सत्यधारा के संपादक अनवर सादिक फैसी ने केरल से मालाबार क्षेत्र के मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों को अलग करके एक नया राज्य ‘मालाबार’ बनाने की माँग की थी। फैसी ने यह भी सुझाव दिया था कि, कोझिकोड को नए मालाबार राज्य की राजधानी बनाया जाए। यह माँग मालाबार क्षेत्र में मुस्लिम आबादी के बढ़ने के कारण उठाई गई थी, जहाँ की 40 फीसद आबादी मुसलमान है।

उल्लेखनीय है कि मुस्तफा ने जिस 'मालाबार' को अलग राज्य घोषित करने की माँग उठाई है, उसके अंतर्गत त्रिशूर, पलक्कड़, मल्लापुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जैसे जिले आते हैं। इन इलाकों में मुस्लिम आबादी की बात करें तो 2011 में जनगणना डाटा के मुताबिक- त्रिशूर में मुस्लिमों की संख्या 17.07% है, पलक्कड़ में 27.96% है, मल्लापुरम में इनकी आबादी 70.24% है, कोझिकोडे में 37.66% है, वायनाड में 28.65% है, कन्नूर में 29.43% है और कासरगोड मे 37.24% है।

इस बीच दिनों केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने की खबर भी सुर्ख़ियों में है। सोमवार (24 जून) को राज्य विधानसभा में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने का प्रस्ताव पास भी किया जा चुका है। नाम बदलने के इस प्रस्ताव को विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF ने भी पूरा समर्थन किया है। सीएम पिनाराई विजयन ने प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार से संविधान में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का आग्रह किया है। इससे पहले यही प्रस्ताव 2023 में भी केरल विधानसभा में पारित किया गया था, मगर कुछ कारणों से इसे दोबारा विधानसभा में रखा गया। इसके पीछे वामपंथी सरकार ने ये दलील दी है कि सूबे का नाम मलयालम में ‘केरलम’ है, इसलिए इसे यही नाम दिया जाए।

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