कुंभ मेले मे शाही स्नान का महत्व

हिन्दू धर्म में धार्मिक परम्पराओं का बड़ा ही महत्व हे प्रत्येक व्यक्ति को सुखद व सम्पन्न जीवन व्यातीत करने के लिए धार्मिक कर्मो से जुड़े रहना अतिआवश्यक होता है। इसी के चलते मानव जीवन में कुंभ शाही स्नान का भी बहुत बड़ा महत्व है। सिंहस्थ कुंभ के बारे में अनेकों तथ्य व जानकारियाँ हिन्दू धार्मिक शास्त्रों से मिलती हे जिसके अनुसार कहा गया हे कि जब देवता व दानव के बीच समुद्र मंथन से जो अमृत प्राप्त हुआ था उसकी कुछ बूंदें कुंभ से कुछ स्थानों में गिरि थी जो कि हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन है - जिसके कारण यहा कि भूमि पवित्र हो गई।

इसलिये कहा गया हे कि यहाँ की नदियों में डुबकी लगाने से प्रत्येक प्राणी के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। 12 वर्षो के समय अंतराल मे आयोजित यह शाही स्नान मानव के जीवन को पापों से मुक्त करता हे व जीवन मे सफलता प्रदान करता है।इस सिंहस्थ कुंभ शाही स्नान का आयोजन माघ के महीने मे होता है। जब सूर्य और बृहस्पति देव सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। 

सिंहस्थ कुंभ शाही स्नान करना कोई छोटी बात नहीं हे इस स्नान के लिए देश विदेश से लाखों करोडों की संख्या में बड़े बड़े साधु संत आते हैं और उनके अखाड़े इस मेले मे लगते हे जिससे मानव उनके दर्शन मात्र से भी अपने जीवन को सुखद बना सकता है। यह कुंभ दर्शन व साही स्नान हर किसी को नहीं मिल पाता हे बड़े ही भाग्य वाले मानुष को मिलता हे और जिसे मिलता हैं उसका जीवन पवित्र बनता हैं व पापों से मुक्त हो जाता है।

इस पवित्र कार्य मे लाखों भक्त लोग अपना योगदान देते हे व संतो की सेवा करते हे तथा दूर दूर से आए लोगों की सहायता करते हे जिससे वे अपने जीवन को सफल बनाते है। क्योंकि कहा गया हे की जन सेवा ही सबसे बड़ी सेवा होती है यह मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म होता हे धार्मिक ग्रंथों मे भी कहा गया हे कि-

"सब ते सेवक धर्म कठोरा"

"सिर धर जाऊ उचित अस मोरा"

सेवा भाव काकर्म सबसे बड़ा धर्म माना गया है मानव के जीवन में एसे धर्म कर्मों का बड़ा ही महत्व है।

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