सेना के भोजन पात्र ने दिलाई विधवा को पेंशन

जयपुर: राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में रहने वाली सैन्य विधवा राजकंवर को 65 साल बाद अब पेंशन मिल पाएगी जो सेना के भोजन पात्र के कारण संभव हो सकी|

जानकारी के अनुसार राजकंवर के पति चुन्नी सिंह 1942 में भारतीय सेना में घुड़सवार के रूप में भर्ती हुए थे. उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया. 1950 में वे घर आए. 1952 में उनकी मृत्यु हो गई. लेकिन राजकंवर को सेना की ओर से कोई पेंशन या अन्य सहायता इसलिए नहीं मिल पाई क्योंकि उनके पास चुन्नीसिंह के सेना में होने का कोई सबूत नहीं था. सिर्फ एक भोजन पात्र था जिस पर कुछ अंक लिखे थे. इन अंकों के आधार पर चुन्नीसिंह का आर्मी नम्बर खोजा गया|

इसके लिए राजकंवर को बरसों बहुत परेशान भी होना पड़ा और सेना के दफ्तरों के चक्कर भी काटने पड़े तब जाकर उनकी पेंशन के आदेश जारी हो पाए. अगले माह से उनकी पेंशन शुरू हो जाएगी|

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