वो महिला जिससे कांपती थी हिटलर की सेना

ये स्टोरी उस लड़की की है, जिसे हिस्ट्री की सबसे भयंकर निशानेबाज का दर्जा प्राप्त है, तथा जिसने हिटलर की नाजी फौज की नाक में दम कर दिया था. केवल 25 वर्ष की उम्र में ल्यूडमिला ने 309 व्यक्तियों को अपना शिकार बनाया था, जिनमें से अधिकतर हिटलर के सैनिक थे. ये उस दौर की बात है, जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था, तथा ल्यूडमिला पवलिचेंको 1942 में वॉशिंगटन पहुंचीं.

हालांकि, कई जानकारों का मानना है कि सोवियत संघ ने ल्यूडमिला को प्रोपेगैंडा के तहत उपयोग किया. यहां तक की उन्हें सोवियत हाई कमान की तरफ से अमेरिका भेजा गया. उन्हें भेजने का इरादा वेस्टर्न यूरोपियन फ्रंट पर अमेरिका का सपोर्ट प्राप्त करना था. जोसफ स्टालिन चाहते थे कि मित्र देशों की सेना यूरोप पर हमला करे, तथा वे इसके लिए उत्सुक भी थे. स्टालिन चाहते थे कि जर्मनों पर अपनी सेना को बांटने का दबाव बनाया जाए, जिससे सोवियत सेना पर उनकी तरफ से आ रहा दबाव कम हो जाए. 

वही स्टालिन का ये मकशद तीन वर्ष पश्चात् तक पूर्ण नहीं हुआ. इसी मिशन को दिमाग में रखकर पवलिचेंको ने व्हॉइट हाउस में कदम रखा. ऐसा करने वाली वो प्रथम सोवियत थीं, जिसे प्रेसिडेंट फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने रिसीव किया. ल्यूडमिला पवलिचेंको ने प्रेसिडेंट रूजवेल्ट की पत्नी एलेनोर रूजवेल्ट के साथ सम्पूर्ण देश की यात्रा की. इस के चलते उन्होंने अमेरिकियों से महिला होते हुए युद्ध में सम्मिलित होने के अपने एक्सपीरियंस शेयर किए. साथ ही ल्यूडमिला भारत की बेहद तेज महिला थी, वे हमेशा युद्ध के लिए तत्पर रहती थी. साथ ही हिटलर की सेना में तो उनका बेहद खौफ था.

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