स्वामी प्रसाद मौर्य से भाजपा लगा रही सपा - बसपा के गढ़ में सेंध

आखिरकार उत्तरप्रदेश की राजनीति में राजनीतिक भूचाल आ ही गया। उत्तरप्रदेश के कद्दावर नेता अपनी पार्टियां बदल रहे हैं। कभी बसपा तो कभी सपा में शामिल हो रहे हैं। बसपा के प्रमुख नेता स्वामी प्रसाद मौर्य भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। मायावती के विरोध के बाद वे भाजपा की शरण चले गए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने मायावती पर कई राजनीतिक वार किए।

लगता है बसपा में उन्हें अपना कद कम नज़र आ रहा था लेकिन उनके दल बदलने से भाजपा पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं कि नोट के बदले वोट मांगने के आरोपी स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा ने अपने दल में शामिल कर लिया है तो फिर भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात कैसे हो सकती है।

हालांकि भाजपा ने स्वामी प्रसाद को शामिल कर मौर्य जाति के वोट अपने नाम कर लिए हैं। उत्तरप्रदेश में जातिगत समीकरण हैं। जातिगत समीकरणों में यादव, दबंग और दलित समुदाय के ही साथ अल्पसंख्यक वोटर भी हैं जहां सपा अल्पसंख्यकों को अपने साथ करने पर ध्यान देती रही है वहीं भाजपा दबंगों और दलितों की सहानुभूति लेना चाहती है।

मायावती अपनी नाकामी से उबर नहीं पाई हैं और उनका जनाधार भी डगमगा रहा है ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य की भाजपा में शामिली को बहुत अहम माना जा रहा है। उन्होंने बसपा में टिकट बेचे जाने और पद तय किए जाने का आरोप लगाया था। भाजपा में शामिल होने के बाद अब सपा और भाजपा को मायावती के खिलाफ एक सशक्त हथियार मिलेगा।

'लव गडकरी'

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