एनडीए के सरकार में लौटने के कयास, लेकिन सत्ता की चाबी दक्षिण के पास

एनडीए के सरकार में लौटने के कयास, लेकिन सत्ता की चाबी दक्षिण के पास

नई दिल्ली: 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर वैसे तो अधिकतर प्री-पोल सर्वे एक बार फिर एनडीए सरकार की भविष्यवाणी कर रहे हैं, किन्तु कुछ में त्रिशंकु संसद की भी आशंका जताई गई है। इसके चलते आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की स्थानीय तेलुगु पार्टियों (टीडीपी, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस) के केंद्र सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका में आने की संभावना बढ़ गई है। 

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अब इन पार्टियों को लगने लगा है कि 2019 में वे केंद्र सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका में होंगी और इससे स्थानीय स्तर पर इनकी आपसी लड़ाई भी और तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा दोनों के ही चुनाव एक साथ होने हैं। वहीं, तेलंगाना में लोकसभा चुनाव है। दोनों राज्यों में कुल मिलाकर 42 लोकसभा सीटें (आंध्र में 25 और तेलंगाना में 17) हैं। इसके साथ ही केंद्र में अपनी भूमिका को देखते हुए टीडीपी, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस पहले ही छोटे-बड़े कई राजनितिक दलों के साथ गठबंधन में हैं। 

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1996-98 के चुनावों में तेदेपा अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू किंगमेकर की भूमिका अदा कर चुके हैं। कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के समक्ष तब तीसरे मोर्चे ने अहम भूमिका निभाते हुए सरकार बनाई थी। वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने थे और इस तीसरे मोर्चे में कई क्षेत्रीय पार्टियां शामिल थीं, जिसमें टीडीपी की भूमिका मुख्य रही थी। यही नहीं 1999 के लोकसभा चुनाव में भी जब एनडीए को सहयोगी की आवश्यकता हुई तो टीडीपी फिर अहम भूमिका में रही और 2004 तक एनडीए सरकार में पार्टी का समर्थन रहा। 

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