क्या 'सेनारी नरसंहार' के आरोपितों को बरी कर देगा सुप्रीम कोर्ट? गला काटकर की गई थी 34 लोगों की हत्या

नई दिल्ली: सेनारी नरसंहार (Senari Massacre) को लेकर बिहार सरकार की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। बिहार सरकार ने सभी आरोपितो को बरी किए जाने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की थी। शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से सबसे पहले सभी 13 बरी आरोपितों को याचिका की प्रतिलपि देने के लिए कहा है। साथ ही सभी को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं। बता दें कि पटना उच्च न्यायालय ने 22 मई को निचली अदालत से दोषी ठहराए गए 13 आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। साथ ही सभी को फ़ौरन जेल से रिहा करने का आदेश भी सुना दिया था। 

बता दें कि इससे पहले जिला अदालत ने 10 दोषियों को फाँसी और तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिला अदालत के फैसले को पटना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार और अरविंद श्रीवास्तव की बेंच ने निरस्त कर दिया था। इस मामले में कुल 70 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें से 4 की मृत्यु हो चुकी है। बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक की माँग करते हुए, सुप्रीम कोर्ट से मामले के निपटारे तक सभी 13 आरोपितों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देने की अपील की थी। 

क्या है सेनारी नरसंहार ?
बता दें कि 18 मार्च 1999 की रात प्रतिबंधित नक्सली संगठन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) के उग्रवादियों ने सेनारी गाँव को चारों तरफ से घेर लिया था। 500-600 उग्रवादी रात के अँधेरे में गाँव में घुस गए थे और घरों से पुरुषों को खींचकर बाहर ले आए। उन्हें तीन ग्रुप में बाँटकर गाँव के बाहर ले जाया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाइन में खड़ा कर बारी-बारी से सभी पुरुषों का गला काटा गया था और उनके पेट चीयर दिए गए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार इस नरसंहार में 34 लोगों की हत्या की गई थी। बताया गया था कि इस नरसंहार में मरने वाले सभी लोग भूमिहार थे। 

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