अयोध्या विवाद: मामले में मध्यस्थता होगी या नहीं, बुधवार को अदालत लेगी अहम् फैसला

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ बुधवार को निर्धारित करेगी कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता या समझौता हो या नहीं. पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर 1 प्रतिशत भी समझौता और मध्यस्थता का चांस है तो इसके लिए प्रयास होना चाहिए. न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा था कि मेडिएशन की प्रकिया पूरी तरह गोपनीय रहेगी और ये भूमि विवाद की सुनवाई के साथ ही चलेगी.

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हिंदू और मुस्लिम पक्षकारो का कहना था कि पहले भी कोर्ट की पहल पर इस तरह से विवाद को सुलझाने के प्रयास विफल रहे हैं. मुस्लिम पक्षकारो की तरफ से वकील राजीव धवन ने कहा था कि मेडिएशन को एक मौका दिया जा सकता है, पर हिन्दू पक्ष को ये स्पष्ट होना चाहिए कि कैसे आगे बढ़ा जाएगा. न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा था कि हम एक प्रॉपर्टी विवाद को निश्चित तौर पर हल कर सकते है, पर हम रिश्तों को बेहतर करने के बारे में सोच रहे है. शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को दस्तावेजों का अनुवाद देखने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया था और कहा था कि हमारे विचार में इस वक्त का उपयोग पक्ष मध्यस्थता के ज़रिए मसला सुलझाने के लिए भी किया जा सकता हैं. 

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गत वर्ष शीर्ष अदालत से मुस्लिम पक्षों को बड़ा झटका लगा था. अदालत ने 1994 के इस्माइल फारुकी के निर्णय में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठभेजने से मना कर दिया था. मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी.

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