कुछ ऐसा है मध्यप्रदेश का इतिहास

मध्यप्रदेश को भारत का दिल कहा जाता है क्योकि यह देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य होने के साथ ही भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक है. इसकी राजधानी भोपाल है जिसे ताल-तलैया का दर्जा प्राप्त है.

दरसल भारत के पांच राज्यो की सीमाओ से जुड़ा होने के कारण यहाँ हर तरह की कला और संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है. यहाँ के जनपदों की आबोहवा में एक अलग क़िस्म की संस्कृति और साहित्य की मधुरता देखने को मिलती है, साथ ही यहां के लोक समूहों में नृत्य, संगीत, गीत की रसधारा सहज रुप से दिखाई देती है. वही नर्मदा, सोन, सिन्ध, चम्बल, बेतवा, केन, धसान, तवा, ताप्ती, शिप्रा, काली सिंध जैसी कई नदियों का संगम भी यही से होकर गुजरता है. साथ ही बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, माधव राष्ट्रीय उद्यान, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से हैं। इन स्थानों पर पक्षियों, जानवरों और पौधों की विस्तृत विविधता देखी जा सकती है। साथ ही यहाँ के पाँच सांस्कृतिक क्षेत्र निमाड़, मालवा, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड और ग्वालियर इस प्रदेश को चार-चाँद लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

वही शिप्रा नदी के किनारे बसा अत्यंत प्राचीन शहर उज्जैन भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल यही स्थित है। यहाँ हर 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है, जो विश्व-प्रसिद्ध है, तो वही ओम्कारेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है।

बात मध्यप्रदेश की हो और खाने का ज़िक्र ना हो तो बात अधूरी रह जाएगी, क्योकि यहाँ के व्यंजनों में मुख्य रूप से राजस्थनी और गुजराती व्यंजन शामिल हैं। वही इस प्रदेश की राजधानी भोपाल तो अपने राजसी खाने जैसे सींक और शामी कबाब के लिए प्रसिद्ध है तो आर्थिक राजधानी इंदौर के पोहे-जलेबी जो भी खाता है वो इसका कायल हो जाता है. लेकिन आप खाने में हर तरह के व्यंजन के शौकीन है तो आपको इंदौर के सराफ़ा और छप्पन दूकान ज़रूर घूमना चाहिए जहाँ आपको पूरी रात खाने की हर वेराइटी मिल जाएगी.

बात फैशन की हो और इस प्रदेश के पांच बड़े शहरो में से एक इंदौर का नाम ना लिया जाए तो फैशन शब्द अपने आप में ही अधूरा सा लगता है क्योकि फैशन के कारण ही इंदौर को मिनी मुम्बई के रूप में जाना जाता है. जिसका सबसे बड़ा कारण यहाँ का मौसम है जो पूरे साल एक समान रहता है ना ज़्यादा गर्मी पड़ती है ना सर्दी. इसलिए यहाँ के लोग फैशन और खाने का पूरा लुफ्त उठाते है.

क्योकि विकास पहल की दृष्टि से देखा जाए तो देश में जितने भी राज्य है उनमे सबसे तेज़ी से विकास मध्यप्रदेश में ही हुआ है. यहाँ तक की मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे बडा सीमेंट उत्पादक राज्य है.

वही मध्य-प्रदेश में शिक्षा के स्तर को देखा जाए तो और राज्यो की तुलना में यहाँ आपको आईआईएम इंदौर, आईआईटी इंदौर, राज्य भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर), माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (भोपाल), बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (भोपाल विश्वविद्यालय), डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी, सागर होने के साथ ही इस राज्य में 208 इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर कालेज और 12 मेडिकल कॉलेज हैं, जो की अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है. क्योकि हमारे देश के बड़े से बड़े कवि माखनलाल चतुर्वेदी से लेकर राहत इन्दौरी, भगवान् दत्त शर्मा सब मध्यप्रदेश से ही ताल्लुख रखते है.

साथ ही राजनीति के सबसे बड़े धुरंधर और महान कवि अटल बिहारी बाजपेई जी भी मध्यप्रदेश के ही रहने वाले है, जिनके बिना साहित्य क्या, देश की राजनीति भी अधूरी सी लगती है. मध्यप्रदेश के राजनीति की बात करे तो यहाँ पर आपको भाजपा का बोलबाला देखने को मिल जायेगा जहाँ शिवराज सिंह चौहान जी पिछले ग्यारह सालो से मुख्यमंत्री की गद्दी संभाले हुए है. जिसका सबसे बड़ा कारण शिवराज द्वारा मध्यप्रदेश में किया गया विकास है जिसको कहीं से कहीं तक नाकारा नहीं जा सकता.

चलते-चलते राहत इन्दौरी साहब की एक कविता ना हो तो मध्यप्रदेश का वर्णन ही अधूरा सा लगता है-

राज जो कुछ हो इशारों में बता ही देना...

हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना...

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे...

जो हो परदेस में वो किससे रजाई मांगे...

शहरों में तो बारूदों का मौसम है...

गांव चलो ये अमरूदों का मौसम है...

मेरी सांसों में समाया भी बहुत लगता है...

वही शख्स पराया भी बहुत लगता है...

उससे मिलने की तमन्ना भी बहुत है...

लेकिन आने जाने में किराया भी बहुत लगता है.

यहाँ बेटियों को सिर्फ 10 रुपए में दिखाई जा रही 'दंगल'....

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