ये उन दिनों की बात है जब डीडी नेशनल आया करता था

कभी एक ऐसा भी समय था जब हम किसी की नहीं सुनते थे और अपनी ही मस्ती में जिंदगी जिया करते थे, और वो समय था बचपन का. आज हम उस दशक की बात कर रहे हैं जब बहुत कुछ ऐसा होता था जो टेक्नोलॉजी से नहीं होता था उसके लिए काफी मेहनत करनी होती थी. पहले के समय में जब टेक्नोलॉजी नहीं थी तब बच्चो की जिंदगी काफी कठिन थी और अब टेक्नोलॉजी है तो बच्चो की जिंदगी बहुत सरल है. तो आइए आज हम बात करते हैं हमारे समय की यानी 90 के दशक की.

रेडियो - जब भी गाना सुनने का मन होता था रेडियो ऑन कर लेते थे और अपने मनचाहे सांग्स का इंतज़ार किया करते थे, टीवी देखने के लिए दूसरों के घर जाया करते थे और अपने घर के रेडियों में खुश रहते थे. रेडियों में गानों की कैसेट लगा कर मस्ती से नाचा करते थे और खूब मस्ती किया करते थे.

स्कूल के प्रोजेक्ट्स - पहले के समय में स्कूल में भी जो भी बनाकर ले जाना होता था खुद ही ले जाना होता था, उसके लिए कोई हेल्प नहीं करता था. पहले कई चींजो को इकट्ठा करते थे और उससे प्रोजेक्ट बनाया करते थे.

नोकिया - पहले के समय में नोकिया के मोटे-मोटे फ़ोन आया करते थे और उसमे हम दिनभर सांप वाला गेम खेला करते थे.

रील वाला कैमरा - पहले के समय में सेल्फी नहीं होती थी ना ही कोई स्टाइल पहले केवल हाथ की घड़ी कर देते थे और रील वाले कैमरे से तस्वीर क्लिक करवा लेते थे.

डीडी नेशनल - पहले टीवी के रिमोट नहीं होते थे केवल दो चैनल आते थे न्यूज़ और डीडी नेशनल, डीडी नेशनल पर हम भुत के शो आप बीती देखा करते थे जो हमे हद से ज्यादा डरवाना लगता था.

गहरे ज़ख्मों को तुरंत भरने में कारगर तकनीकी है 3डी प्रिटिंग

करीब 1.30 लाख सफल ऑपरेशन कर चुकी ये ट्रेन हॉस्पिटल

यहाँ से होकर जाता है पाताल का रास्ता

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -