एंटी टेररिज्म डे: मात्र आतंक को रोकना या उसे ख़त्म करना

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की पुण्यतिथि को राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी दिवस (नेशनल एंटी टेररिज्म डे) के रूप में भी मनाया जाता है, यह दिन आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता फ़ैलाने के लिए मनाया जाता है. आतंकवाद रोधी दिवस का उद्देश्य लोगों को आतंकवाद और हिंसा से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है. अगर देश की बात की जाए तो आतंकवाद शब्द यहाँ के वासियों के लिए नया नहीं है. पाकिस्तान के भारत से अलग होने के बाद से ही भारत के लोग इस शब्द की वीभत्सता से परिचित हो गए थे.

जम्मू कश्मीर में सीमा पर से होने वाली आतंकी घुसपैठ से लेकर, कश्मीर के युवाओं को देश के खिलाफ भड़काने तक, सब आतंकवाद का ही स्वरुप हैं. रोज़ाना अख़बार की खून से लथपथ घटनाएं हर घर की चौखट पर चीख-चीख कर आतंक का घिनोना चेहरा बयां करती हैं. कभी देश के जवानों के शहीद होने का तो कभी निर्दोष नागरिकों के आतंकियों की गोली का निशाना बनने की खबर से देश के आम नागरिक से लेकर राजनेताओं तक कोई भी अनभिज्ञ नहीं है, सभी को पता है की आतंक के इन साँपों को पाकिस्तान ही पालता है.

हर आतंकी घटना के बाद, हमलों की कड़ी निंदा की जाती है, ठोस कदम उठाने की बात की जाती है, मीडिया में तीखे तेवर दिखाए जाते हैं, लेकिन घटनाएं कम होने के बजाए उल्टा बढ़ रहीं हैं. जब हमे पता ही है कि सीमा पार से आतंकी आए दिन आतंकी हमले होते रहते हैं, तो हमारी सरकार क्यों मात्र उसके हमले रोकने का प्रयत्न करती है ? हमारी सेना को मात्र सीमा पर एक ढाल बना कर खड़ा कर रखा है, जबकि उसे तलवार बनाने की जरुरत है, जो आतंकवाद के सीने के पार हो जाए. 

जमशेदजी टाटा को पुण्यतिथि पर नमन

 

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