चिकित्सा उपकरण की कमी को दूर करने के लिए नीति आयोग ने किया ऐसा काम

देशव्यापी महामारी कोरोना के कहर के बीच चिकित्सा उपकरण और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में गठित अधिकार प्राप्त समूह ने आपसी संवाद का काम शुरू कर दिया है. समूह की तरफ से इस दिशा में निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स के बीच आपसी संवाद की प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि चिकित्सा उपकरण और पीपीई के उत्पादन में तेजी के लिए आपसी सहयोग बन सके.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि स्वास्थ्य संबंधी समाधान के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स के साथ वेंटिलेटर से लेकर मास्क व अन्य उपकरणों की मांग के मुताबिक आपूर्ति को लेकर भी समूह ने 8 स्टार्टअप्स, औद्योगिक संगठन सीआईआई की 12 हस्तियां, फिक्की के 6 सीईओ सदस्य और नैसकॉम से जुड़े 14 सीईओ के साथ विचार-विमर्श किया. समूह की तरफ से नए प्रकार के वेंटिलेटर डिजाइन, जांच के उपकरण और निगरानी समाधान क्षेत्रों में काम कर रहे अगमा, बायोडिजाइन इनोवेशन लैब, काईएनात, क्योर एआईड्रोन मैप, एमफाइन माइक्रोगो जैसे स्टार्टअप्स से संपर्क किया गया है ताकि उनके पैमाने और संभावित योगदान का आकलन किया जा सके.

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वायरस के प्रकोप के चलते निजी क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए कांत की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त समूह का गठन किया गया है. कोविड-19 से लड़ने एवं रणनीति तैयार करने के लिए यह समूह संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से समन्वय स्थापित करने का काम कर रहा है. निजी क्षेत्रों के लिए औद्योगिक संगठन सीआईआई, फिक्की, एसोचैम व नैसकॉम से समन्वय स्थापित करेगा.

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