लॉकडाउन : कोरोना संक्रमण के बीच इन दालों की फरमाइश कर रहे राज्य

Mar 31 2020 06:26 PM
लॉकडाउन : कोरोना संक्रमण के बीच इन दालों की फरमाइश कर रहे राज्य

देश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए 21 दिनों का लॉकडाउन लगाया गया है. लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के मुश्किल वक्त में भी कुछ राज्यों को अपनी पसंद दाल चाहिए, जिसकी उन्होंने फरमाइश भी कर दी है. दिलचस्प है कि जिन उत्तरी राज्यों ने प्रीमियम दालों की मांग रखी है, उन्होंने कभी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ( पीडीएस ) पर दाल नहीं बांटी है. ऐसे राज्य हमेशा दाल बांटने को जहमत बताकर पल्ला झाड़ते रहे हैं. इसमें भी कई राज्यों ने साबुत दलहन लेने के बजाय तैयार दालों की मांग रखी हैं.

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इस मामले के सामने आने के बाद राहत की बात यही है कि केंद्रीय सरकारी एजेंसी नैफेड के गोदामों में तकरीबन 32 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है, जो जरूरत से बहुत अधिक है. लॉकडाउन से उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की है, जिसमें गेहूं, चावल के साथ दाल देने का भी प्रावधान किया गया है. 

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अनाज व दालों का पर्याप्त स्टॉक है, जो बांटने के काम आ जाएगा. पीडीएस की जरूरतों के बाबत केंद्र ने राज्यों के साथ पिछले सप्ताह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की, जिसमें उनकी दालों की जरूरत के बारे में पूछा गया. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जहां चना दाल खाने की परंपरा है, वहां की सरकारों ने केंद्र से इसकी जगह प्रीमियम कही जाने वाली मूंग व उड़द की दाल मांगी. आमतौर पर दालों के बफर स्टॉक से जब भी जरूरत हुई तो दक्षिणी राज्यों ने समय-समय पर दालों का उठाव किया, लेकिन उत्तरी राज्य इसे जहमत मानते हुए इससे बचते रहे. नैफेड के पास फिलहाल दालों का जो स्टॉक है, उसका आधा हिस्सा चना है.'

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