ईस्टर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

दिल्ली: कल ईस्टर का त्यौहार मनाया जाने वाला है लेकिन  ईस्टर  की कोई फिक्स डेट नही हैं. गिरिजाघर के अनुसार, गणना के आधार पर विषुव की तारिक 21 मार्च है. इसलिए ईस्टर की डेट कभी 22 मार्च और कभी 25 अप्रैल के बीच बदलती रहती है. पर जितने भी पूर्वी ईसाई है उनकी गणना जूलियन कैलेंडर पर आधारित की है.

इस कैलेंडर के अनुसार 21 मार्च की तिथि इक्कीसवी सदी के दौरान ग्रीगोरियन कैलेंडर के 3 अप्रैल के दिन पड़ती है.जूलियन कैलेंडर के अनुसार ईस्टर के त्योहार व पर्व व उत्सव 4 अप्रैल से 8 मई के बीच में पड़ता है. ईस्टर डेट सिर्फ संकेतों के प्रयोग के आधार पर ही नही बल्कि कैलेंडर में अपनी स्थिति के अनुसार भी यहूदी पास्का या यहूदी ईस्टर से सम्बंधित हैं. सर्वप्रथम रूप से कुछ नयी चीजें जैसे की ईस्टर बनी अथवा ईस्टर एग्ग हंट्स  छुट्टियों में भी इसका बहुत बड़ा महत्व है.

ईस्टर को ईसाई समुदाय के लोगो के अलावा गैर-ईसाई लोग भी इस पवित्र त्यौहार को बहुत ही ख़ुशी और समान रूप से मनाते हैं. परन्तु कुछ ईसाई वर्ग के लोग ऐसे भी है जो ईस्टर नही मनाते हैं.  ईसाई धर्म किसी भी अन्य धर्म के विपरीत एक निर्णायक महत्व सहित ऐतिहासिक घटनाओं पर टिका है. अगर यीशु मसीह की मृत्यु हो गई और वे कभी जीवन में नहीं लौट सकते तो ईसाई धर्म एक मिथक या एक धोखा है.

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