पाक से वापसी के बाद जवान नहीं करना चाहता देश सेवा

मुंबई : 29 सितंबर, 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान सेना के जवान महाराष्ट्र के धुले के रहनेवाले चंदू बाबूलाल चव्हाण गलती से सीमा पार चले गए थे. उनकी पोस्टिंग 37 राष्ट्रीय राइफल्स के साथ जम्मू-कश्मीर के पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास थी. पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया. वह बताते हैं कि पाक जेल में उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. वहां हर दिन एक साल की तरह गुजरा.उन्होंने कहा कि जनवरी 2017 में वह देश वापस आए. 


वह बताते हैं कि पाकिस्तान में तीन महीने 21 दिन तक रहे. लौटने के बाद उनके खिलाफ जांच हुई और 89 दिन की सजा काटी. वापस आने के बाद वह एक बार फिर सेना की सेवा के लिए तैयार हुए और कहा था कि यही एक सैनिक का जज्बा होता है. उन पर आरोप था कि उन्होंने बिना अपने सीनियर्स को बताए हथियारों के साथ कैंप छोड़ा था. जेल में सजा काटने के बाद उन्हें मानसिक इलाज के लिए खडकी में सेना के अस्पताल भेजा गया.

मगर इस सबसे जवान का मनोबल टूट चुका है और वह अब वापस अपने गांव होरविहीर जा रहे हैं. वह कई बार अपने सीनियर्स को चिट्ठी लिख सेवा से निवृत्त होने की अनुमित मांग चुके हैं. वह कहते हैं कि उनसे तरह-तरह के सवाल किए जाते हैं. लोग पूछते हैं कि वह पाकिस्तान क्यों गए, उनसे किसने कहा था, क्या वह योजना के तहत गए थे? अब वे देश सेवा नहीं करना चाहते. असलियत से अभी तक पर्दा नहीं उठा है मगर देश का यह सिपाही पूर्ण रूप से अपना मनोबल हार चुका है. 

 

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