तो इसलिए आपकी संतान राह से भटक रही है

तो इसलिए आपकी संतान राह से भटक रही है

जब किसी भी घर में कोई बच्चा होता है तो उसके मां-बाप उसके होने से पहले ही उसके भविष्य के सपने देखने लगते हैं। लेकिन जब वही बच्चा बड़ा होता है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाता है। जी हां अक्सर यही देखने को मिलता है कि जब बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता तो वह बिगड़ जाते हैं। आज हम आपको कुछ इन्ही कारणों के बारे में बताने वाले हैं जिनसे आपको भी इस बात का पता चलेगा कि आखिर किन कारणों से आपकी संतान राह से भटक गयी हैं। यहां पर हम जो आपको कारण बता रहे हैं वह पूरी तरह से जयोतिषशास्त्र के द्वारा बताये गये कारण हैं तो चलिए देखते हैं कि क्यों आपकी संतान राह से भटक जाती है?

जन्मपत्रिका के चतुर्थ भाव में तुला राशि में सूर्य स्थित हो या किसी भी राशि में चतुर्थ भाव में मंगल, शनि, राहु या केतु स्थित हो 

घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा के मध्य भाग से अग्नि कोण के बीच स्थित हो । 

पिता भूखंड के उत्तर दिशा में तथा संतान दक्षिण में निवास करती हो । 

जन्मपत्रिका में सूर्य निर्बल अवस्था या तुला राशि में स्थित हो 

घर का वायव्य कोण में संतान का शयन कक्ष हो । 

घर का मुख्य द्वार अग्निकोण में हो । 

भूखंड का ईशान कोण कटा हुआ हो ।

 

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