ऐसे हुआ बिकिनी पहनने का चलन

ऐसे हुआ बिकिनी पहनने का चलन

महिलाओं में बिकिनी पहनने को लेकर काफी क्रेज रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिकिनी पहनने की शुरुआत कब से और कहाँ से हुई. अलग-अलग जगह के लोग अलग-अलग कहानी बताते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बिकिनी पहनने की शुरुआत 20वी सदी में हुई थी. अमेरिकन गारमेंट डिज़ाइनर कार्ल जेंटजेनिन के द्वारा टू पीस के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी. वहीँ कुछ लोग बताते हैं कि महिलाओं के ओलिंपिक में हिस्सा लेने के बाद ही स्विमसूट पहनने की शुरुआत हुई थी. लेकिन आजकल महिलाएं बिकिनी पहनकर अपने प्राइवेट पार्ट्स को फ्लॉन्ट करना काफी अच्छा समझती हैं. यह उनके लिए एक फैशन बन चूका है.

1990 के दशक में बेदिंग सूट के नाम पर एक सिंगल गारमेंट हुआ करता था और उस समय बीच पर बिकिनी पहनने की इजाज़त किसी को भी नहीं हुआ करती थी. इसके बाद एक दौर ऐसा भी आया जब महिलाओं ने खुलेआम बिकिनी पहनना शुरू कर दिया था. इसके बाद कई लोगों द्वारा इसका विरोध किया गया. लेकिन सरकारों द्वारा अलग-अलग नियमों के तहत बिकिनी पहनने को मंजूरी मिल गई और इसे उचित कर दिया गया.

साल 2000 तक बिकिनी पहनना काफी आम हो गया था और महिलाएं बिकिनी में खुद को काफी कम्फर्टेबल महसूस करती थी. बिकिनी के बढ़ते चलन को देखते हुए कई डिज़ाइनर्स ने बिकिनी को लेकर एक्सपेरिमेंट्स करना शुरू कर दिए और डिज़ाइनर बिकिनी बनाने लगे. साल 2000 के बाद बिकिनी एक फैशन स्टेटमेंट के साथ-साथ महिलाओं की ज़रूरत भी बन चूका था. बिकिनी पहनने से महिलाओं को फिट होने का एहसास होता है.

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