रिश्तों में आने लगे तनाव तो अपनाएं ये टिप्स

Apr 29 2015 06:16 PM
रिश्तों में आने लगे तनाव तो अपनाएं ये टिप्स

शादी जैसा बंधन दो लोगों का जन्म भर का रिश्ता है जिसमें सिर्फ और सिर्फ प्यार की ही अपेक्षा की जाती है । साथ रहते-रहते, एक दूसरों के गुणों की तारीफ करते हुए एक समय ऐसा भी आता है, जब दोनों एक-दूसरे की आलोचना करने लगते हैं । ऐसे में उन्हें अपने साथी की खूबियां भी कमियों के रूप में नजर आने लगती हैं । यह ऐसी स्थिति है जो  इशारा करती है कि रिश्तों में खतरे की घंटी बजने लगी है क्योंकि उस समय रिश्तों मेें तनाव पनपना शुरू हो चुका है । 

* काम करें साथ-साथ
जब दोनों में से कोई एक अपने साथी को कमतर समझने लगे या छोटा दिखाने की कोशिश करने लगे, तो जाहिर सी बात है कि दूसरे के मन में तनाव उपजने लगता है । दो लोग जब जीवन भर के लिए एक डोर में बंधते हैं, तो उन के बीच प्यार के रिश्ते में सांझी शक्ति एवं समझ प्रेमी जोड़ों से कहीं बेहतर होती है । अपने उसी प्यार को जगाने के लिए एक साथ मिलकर कोई काम या एक्टिविटी के लिए हफ्ते में एक बार इकट्ठा समय अवश्य निकालें । इसमें मूवी देखना, घूमने जाना, कुकिंग, सफाई या कोई अन्य घरेलू काम भी हो सकता है । 

* आलोचना करने से बचें
‘तुम्हारा हेयर स्टाइल मुझे बिल्कुल पसंद नहीं’ या ‘तुम्हें मेरे लिए यह शर्ट खरीदने से पहले मुझ से पूछ लेना चाहिए था’  या ‘तुम्हारे दोस्तों की निठल्ली मंडली मुझे बिल्कुल पसंद नहीं’ या फिर ‘सहेलियों से गप्पें मारने से अच्छा है कोई काम ही कर लो’ जैसी एक-दूसरे की आलोचनाएं करने से परहेज करें। एक बात का ध्यान रखें कि सलाह देने और आलोचनात्मक शब्दों में अंतर होता है। जब आवाज में आदेशात्मक स्वर आ जाता है तो वह आलोचना को और अधिक गंभीर बना देता है जिससे सामने वाले को लगता है कि उसकी अपनी कोई अहमियत नहीं रही ।

* प्यार भरा अंदाज
अपने साथी को कोई काम करने को कहना भले ही आपका हक है परंतु यदि आप सौम्य शैली अपनाएं या ‘प्लीज’, ‘जानू’ या ‘हनी’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर उन से कोई काम करने को कहें तो कोई कारण नहीं कि वह आपके काम को करने से इंकार कर पाएं । यही नहीं आपका प्यार भरा अंदाज उन्हें आपके और भी करीब ले आएगा ।

* उनके जीवन पर नियंत्रण क्यों
अपने जीवन साथी को कभी भी यह बताने का प्रयास मत करें कि वह किस समय क्या करे, किससे मिले या फिर दोस्तों के साथ कब बाहर जाए । इस प्रकार की बातों से उसे लगेगा कि आप उसके जीवन को अपने ढंग से नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं । आप से व्यक्तिगत फैसला लेने की ताकत छीन लेता है या आपके फैसले में भागीदार बनता है तो अपनी पर्सनैलिटी के गौण होने के सवाल पर किसी के मन में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है ।

* नजरअंदाज न करें
यह सोच रखना बुरी बात नहीं है कि आपका साथी हमेशा सही होता है परंतु जब वह दूसरों के सामने हमेशा खुद को सही ठहराने की कोशिश करे तो इसका अर्थ है कि उसमें अपनी गलती कुबूल करने की क्षमता नहीं है जो एक समस्या बन सकती है। मधुर संबंधों को बरकरार रखने के लिए दोनों को ही एक-दूसरे की इच्छाओं का ख्याल रखना चाहिए। 

* डिप्रैशन न हो हावी
इस बात का ध्यान रखें कि डिप्रैशन की बीमारी खतरनाक होती है। डिप्रैशन की स्थिति आने पर व्यक्ति दुनिया को निराशाजनक नजरिए से देखने लगता है। इस के लिए जरूरी है कि अपने साथी से हमेशा उसकी रूटीन के बारे में पूछते रहें खास तौर पर अपनी पत्नी से, फिर चाहे वह घर पर रहे या जॉब पर जाए, ताकि उसे यह एहसास रहे कि आप को उस की परवाह है जब कभी उस पर डिप्रैशन हावी होने लगे तो वह आपको तुरंत बता सके, जिसका निदान समय रहते किया जा सके।

* भावनाओं की मिठास
पति-पत्नी का संबंध रिश्ते की ऐसी डोर है जिसमें न तो तनाव होना चाहिए और न ही कड़वाहट । दोनों के रिश्तों में आपसी समझ और एक दूसरे के साथ की ऐसी ललक होनी चाहिए, जिस से  रिश्ते में मुस्कुराहट और मधुर भावनाओं की मिठास हमेशा बरकरार रह सके ।