सेहत के लिए खतरनाक है 'ओवर द काउंटर' एंटीबायोटिक्स

हम में से बहुत से लोग तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते जब तक कि हमें कोई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम न हो. बुखार,जुखाम और छोटी-मोटी बीमारियों के लिए तो हम किसी भी मेडिसिन स्टोर पर जाकर दावा खरीद लेते हैं. एक दवा ऐसी है जिसका उपयोग अमूमन हर घर में धड़ल्ले से होता है और वो है एंटीबायोटिक। ऐसी दवा को हम बिना कुछ सोचे समझे, बगैर इसके साइड इफेक्ट्स जाने इसका सेवन करते है जो एक तरह से अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करने के बराबर है। हमारा आपसे यही कहना है कि बिमारी चाहे छोटी हो या बड़ी, खुद के डॉक्टर बनने से नुक्सान ही होता है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 30-40 वर्षों से कोई नई एंटिबायोटिक दवा नहीं आई। पुरानी एंटिबायोटिक दवाओं के बेतहाशा और गैरजरूरी इस्तेमाल के चलते प्रतिरोधकता उत्पन्न हो रही है। साथ ही जल और मिट्टी प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इसलिए एंटिबायोटिक के गैर जरूरी इस्तेमाल पर रोक नहीं लगी तो सेहत के लिए खतरनाक साबित होगा। ऐसी दवाओं के इस्तेमाल पर कोई रोकटोक नहीं है।

कोई भी इंसान बिना प्रिस्क्रिप्शन के भी किसी भी मेडिसिन स्टोर से दवाएं खरीद लेता है। यह फैक्ट हैं कि एंटिबायोटिक मेडिसिन बनने की सबसे ज्यादा कम्पनीज भी इंडिया में ही है। उन कंपनियों से निकला केमिकल और दवा का मॉलिक्यूल पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर रहा है। जो सब्जियों और खाने पीने की चीजों में मिलकर शरीर में पहुंच रहा है। यही हाल रहा तो बीमारियों में उन दवाओं का असर नहीं होगा।

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