उज्जैन में बाढ़ का कहर, पानी में डूबा ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर

उज्जैन : ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर। जहां तड़के 2 बजे से ही श्रद्धालु कतार में लगकर भूतभावन श्री महाकाल की दीव्य भस्मारती देखने के लिए आतुर रहते हैं। बारह ज्योर्तिलिंग में एक मात्र ऐसा मंदिर जहां भस्मारती होती है। आज का दिन इस मंदिर के लिए बेहद ऐतिहासिक और आश्चर्यचकित कर देने वाला रहा। जी हां, आज जब भस्मारती के लिए मंदिर के पंडे पुजारियों ने बाबा महाकालेश्वर के गर्भगृह के पट खोले तो राजाधिराज श्री महाकालेश्वर जलमग्न हो चुके थे। पंडे - पुजारियों को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर ये क्या हो रहा है। भस्मारती के समय बाबा का ज्योर्तिलिंग आधा जल में निमग्न नज़र आया। ऐसा लगा जैसे बारिश में उफनी शिप्रा साक्षात् श्री शिव का अभिषेक करने चली हो।

मंदिर में प्रतिष्ठापित अतिप्राचीन कोटितीर्थ कुंड का जल भी मंदिर परिसर में बहने लगा। तो दूसरी ओर श्री हरसिद्धि मंदिर के समीप मौजूद रूद्र सागर उफन गया। रूद्रसागर का पानी श्री महाकाल प्रवचन हाॅल, श्री महाकाल धर्मशाला समेत आसपास के क्षेत्रों में फैल गया साथ ही जल श्री महाकालेश्वर मंदिर के नंदी हाॅल में भी पहुंच गया। ऐसे में मंदिर में दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुए तो दूसरी ओर श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में भी पानी भर गया।

दरअसल गत शनिवार से उज्जैन और इसके आसपास के क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण शिप्रा नदी उफान पर आ गई। इस दौरान उज्जैन में भी करीब 22 इंच बारिश दर्ज की गई। नदी का पानी अपने तट बंध तोड़ते हुए सभी घाटों को अपने में समाता हुआ रिहायशी इलाकों में घुस गया तो दूसरी ओर अतिप्राचीन रूद्रसागर लबालब भर गया और रूद्र सागर का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने लगा।

हालात ये रहे कि रामघाट से सटे रामानुजकोट में राहत कार्य के लिए नाव चलाना पड़ी। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में भी पानी पहुंचा और श्री महाकालेश्वर जलमग्न हो गए। पंडितों का कहना है कि इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब श्री महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग तक पानी पहुंचा हो। ऐसे में भस्मारती की औपचारिकताऐं ही की जा सकीं। लगातार बारिश के चलते जिले में विद्यालयों में आज भी अवकाश घोषित किया गया है दूसरी ओर 5000 से अधिक लोगों को राहत शिविरों की ओर पहुंचाया गया है। दूसरी ओर मंगलवार को भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से करीब 600 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

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