मंगलवार को लगती है यहां श्रद्धालुओं की कतार

मंगलवार को दिन यूं तो बेहद शुभ होता है। इस दिन मंगल दोष से पीडि़त जातक पूजन अर्चन करवाते हैं। मगर यह वार भगवान हनुमान की भक्ति के लिए भी जाना जाता है। दरअसल भगवान श्री हनुमान अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं। इनका निवास गंदमार्दन पर्वत माना गया है। और ये शिव जी के ही रूद्रावता हैं। मंगलवार दिन मंगलनाथ के रूप में शिवलिंग का पूजन किया जाता है यही नहीं श्री हनुमान जी को पूजने और ध्याने से मंगल दोषों की पीड़ा शांत होती है।

कलियुग में श्री हनुमान जी का एक ऐसा धाम है जहां आज भी श्रद्धालु श्रद्धा से शीश नवाते हैं। सवाई माधोपुर में करीब ढाई सौ वर्ष पूर्व एक कुंऐं का निर्माण करते समय करीब 30 फीट पर श्री हनुमान जी की दीव्य प्रतिमा प्राप्त हुई जिसे प्रतिष्ठापित किया गया। श्री हनुमानजी के पूजन करने आने वालों के काम बनने लगे और यह क्षेत्र बहुत ही चमत्कारी क्षेत्र के तौर पर लोकप्रिय हो गया। एक महात्मा ने यहां आकर कठोर आराधना की।

उन्हें श्री हनुमानजी की कृपा से एक पुत्र रत्न मिला। इसके बाद यहां विधिवत मंदिर बनाया गया। आज भी यहां आने वालों के काम बन जाते हैं। मंगलवार के दिन श्रद्धालु यहां नारियल अर्पित करते हैं तो भगवान को चने - चिरौंजी का प्रसाद अर्पित करते हैं। यहां हुनमान चालिसा और संुंदरकांड के पाठ भी किए जाते हैं। अखंड रामायण का पाठ भी श्रद्धालु अपनी  मांग पूर्ण  किए जाने को लेकर करवाते हैं।

इस मंदिर में आने वाले के सभी काम बन जाते हैं। भगवान को सिंदूर का चोला चढ़ाने वालों की कतार पहले से ही लगी रहती है। हर किसी को एक नियत दिन दे दिया जाता है। उस दिन उसी के द्वारा दी गई दक्षिणा से भगवान को चोला चढ़ाया जाता है। भगवान का मंदिर इतना चमत्कारी है कि यहां आने वाले को रोग मुक्ति मिलती है और वह हर चिंता व भय से मुक्त हो जाता है। 

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