जीवन की क्रूरता को दूर करते हैं अक्रूरेश्वर महादेव

Feb 08 2016 07:15 PM
जीवन की क्रूरता को दूर करते हैं अक्रूरेश्वर महादेव

मध्यप्रदेश के उज्जैन में प्रतिष्ठापित श्री अक्रूरेश्वर महादेव मंदिर बड़ा ही चैतन्य है। इस मंदिर में शिवत्व का प्रभाव नज़र आता है। भगवान के इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाऐं पूर्ण हो जाती हैं। यहां सोमवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सोमवार को शिव को जल और पंचामृत चढ़ाने से पुण्यों की प्राप्ति होती है। सोमवार को भगवान शिव को पुष्प अर्पित करने से सारे काम बन जाते हैं। यहां दर्शन करने वाले को असीम शांति का अनुभव होता है। यह क्षेत्र अंकपात में शामिल है। मंदिर बहुत ही जागृत है। 

इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां माता पार्वती ने शिव के गण को पूजन करने के लिए कहा था जिससे वह श्राप मुक्त हो गया था। माता पार्वती एक बार क्रोध से धरती पर पहुंची। इस दौरान उन्हें यक्ष, किन्नर, गण, अचर, चर आदि ने नमस्कार किया लेकिन भृंगिरीट गण ने उन्हें प्रणाम नहीं किया। उसने स्तुति नहीं की थी। भृंगिरीट गण के नमस्कार न करने के कारण भृंगिरीट का कथन था कि वे शिवजी के पुत्र हैं वे उनकी शरण में हैं।

माता पार्वती ने क्रोधित होकर भृंगिरीट को श्राप दिया। ऐसे में वे पुष्कर जाकर तप करने लगे। मगर तब भगवान शिव और आदि देवों ने उन्हें शापमुक्त होने का उपाय बताया। उनकी प्रसन्नता से वे शाप मुक्त हो सकते हैं। शिवजी की बात सुनकर उन्होंने श्रद्धापूर्वक मां पार्वती की स्तुति की। मां ने खुश होकर कहा कि तुम श्री महाकाल वन जाओ अंकपात क्षेत्र के आगे दिव्य शिवलिंग है।

इस शिवलिंग का पूजन कर श्राप मुक्त हो सकते हैं। लिंग के दर्शन से क्रूरता दूर हो सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी बुद्धि निर्मल हो सकती है। तुम्हें फिर से कैलाश लोक प्राप्त होगा। ऐसे में भृंगिरीट ने शिव जी की आराधना की। 

पूजन से भगवान शिव और पार्वती प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे शाप मुक्त किया। उन्होंने श्री अक्रूरेश्वर महादेव के दर्शन किए। भगवान ने वरदान दिया कि अक्रूरेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से क्रूरता दूर होती है और बुद्धि निर्मल होती है। यहां दर्शन करने वाले की सभी मनोकमनाऐं पूर्ण होती है।