किस तिथि में होता है श्राद्ध का फल

Oct 09 2015 12:59 AM
किस तिथि में होता है श्राद्ध का फल

इस श्राद्ध पक्ष में सौलह श्राद्ध होते हैं जिनका अलग - अलग महत्व होता है। ऐसे में वार और तिथि का भी श्राद्ध कर्म के फल पर अलग प्रभाव पड़ता है। विद्वानों द्वारा अलग अलग तरह से इन तिथियों में श्राद्ध करने की बात कही गई है। श्राद्ध पक्ष में सौलह श्राद्ध की अनेक विधियां हैं। इस दौरान नवमी तिथि का श्राद्ध घोड़े के समान पशुओं की प्राप्ति करवाता है। दशमी तिथि का श्राद्ध गोधन की समृद्धि देता है। दो खुरवाले पशुओं की प्राप्ति होती है।

एकादशी तिथि का श्राद्ध बर्तन, वस्त्र और ब्रह्वर्चस्वी पुत्र का लाभ प्रदान करता है। द्वादशी तिथि का श्राद्ध सोना, चांदी आदि की प्राप्ति करवाता है। त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध जाति बंधुओं में श्रेष्ठता प्रदान करता है। इसके अलावा गुरूवार का श्राद्ध विद्याप्राप्ति के लिए बेहतर होता है। शुक्रवार का श्राद्ध धनप्राप्ति के लिए योग्य है। शनिवार का श्राद्ध आयुष्यवृद्धि प्रदान करता है और रविवार का श्राद्ध आरोग्यता प्रदान करता है। इसी तरह भीष्माष्टमी श्राद्ध गर्भ सुख की कामना से किया जाता है।

माघ शुक्ल अष्टमी, अर्थात् भीष्माष्टमी तिथि पर किया जाने वाला श्राद्ध भीष्माष्टमी श्राद्ध कहता है। भीष्माचार्यजी के लिए श्राद्ध या तर्पण किया जाता है। नांदी श्राद्ध मंगल कार्य के आरंभ में किया जाता है। पुण्याहवाचन के समय श्राद्ध किया जाता है। इसे नांदी श्राद्ध कहा जाता है। पितृत्रय, मातृत्रय, मातामहत्रय का उच्चारण भी इस दौरान किया जाता है। वृद्धिश्राद्ध नवजात शिशु के जन्म के बाद किया जाने वाला श्राद्ध है। जो श्राद्ध तीर्थों में किया जाता है। उसे तीर्थ श्राद्ध कहते हैं। यह बेहद पुण्यदायी होता है। प्रयाग आदि तीर्थों में किया जाने वाला श्राद्ध बहुत उत्तम होता है इसे तीर्थ श्राद्ध कहते हैं।