सर्वपितृ अमावस्या पर पितृमोक्ष तीर्थों पर लगा श्रद्धालुओं का तांता

आश्विन मास कृष्ण पक्ष अमावस्या पर सौलह श्राद्ध विधियों का समापन होता है। इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस तिथि में सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध करना पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि जिन पितरों की तिथि हमें ज्ञात न हो उन पितरों का भी श्राद्ध इस अवधि में किया जाता है। आज के दिन इस तिथि को बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। श्राद्ध पक्ष अमावस्या के दिन सोमवती अमावस्या का यह संयोग करीब 3 वर्ष बाद बना है।

अब ऐसा योग संभवतः 2028 में बनेगा। श्राद्ध पक्ष की इस अमावस्या के दौरान सुबह से ही पितृमोक्ष के तीर्थों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं ने इन तीर्थों में पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान, तर्पण, अध्र्य और दान पुण्य आदि किया। इस दौरान लोगों ने पूजन भी किया। गया, प्रयास, नासिक और मध्यप्रदेश के उज्जैन में भी पितृमोक्ष तीर्थों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

उज्जैन में अतिप्राचीन सिद्धवट पर श्रद्धालुओं ने दूध अर्पित कर पुण्यलाभ लिया। इस दौरान सिद्धवट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी पितृमोक्ष की कामना से पूजन - अर्चन किया और पितरों के मोक्ष की कामना से गाय और कौओं को ग्रास दिया। सोमवार होने से आज का श्राद्ध सौभाग्यदायक रहा। तो श्राद्ध कर्म करने वाले की सकल इच्छा की पूर्ति करने वाला रहा। श्राद्ध पक्ष के इस माह का समापन अमावस्या के श्राद्ध से हुआ।

सोमवती अमावस्या होने से सुबह से ही तीर्थों में स्नान करने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। सोमवती और श्राद्ध पक्ष अमावस्या होने के कारण बाधाओं से पीडि़त व्यक्तियों को उज्जैन में पीड़ा से मुक्ति दी गई। मान्यता है कि इस अमावस्या पर प्रेत बाधा से पीडि़तों को मुक्ति दी जाती है। 

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