बिहार चुनाव : अकेले 150 सीटों पर लड़ेगी शिवसेना

पटना​ : शिवसेना द्वारा हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिसमें यह बात सामने आई है कि शिवसेना बिहार में 150 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी। शिवसेना द्वारा लिए गए इस निर्णय से बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। दरअसल यह माना जा रहा है कि शिवसेना के बिहार चुनाव में लड़ने से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे ऐसे में जनता परिवार महागठबंधन की ओर वोटों का धु्रवीकरण नहीं हो पाएगा।

महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा में गठबंधन के साथ सत्ता में आई शिवसेना द्वारा अपने प्रांतीय सम्मेलन में बिहार में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया। पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने मीडिया को बताया कि उनका दल बिहार विधानसभा चुनाव को गंभीरता से ले रहा है। पार्टी अकेले के दम पर ही चुनाव लड़ने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन की प्रकिया पूर्ण हो चुकी है। उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द ही जारी कर ली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में परस्पर राजनीति के विरोधी माने जाने वाली शिवसेना और एमआईएम के आमने-सामने आने से बिहार चुनाव बेहद दिलचस्प हो जाऐंगे। इन चुनावों में किसी भी गठबंधन की जीत की बात फिलहाल तय नहीं हो पा रही है। माना जा रहा है कि भाजपा के नेतृत्व वाले दलों द्वारा बिहार चुनाव में अपनी दमदार दावेदारी सामने रखी जा सकती है। गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा को बिहार से दरकिनार करने के लिए कांग्रेस, आरजेडी का सहारा लिया है। 

ये सभी दल इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आखिर भाजपा को बिहार की सत्ता से किस तरह से बेदखल किया जाए। बिहार चुनाव को लेकर शिवसेना के मैदान में आने को लेकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना में देश को अखंड और हिंदू राष्ट्र बनाने की शक्ति है। शिवसेना ने कभी नकाब पहनकर राजनीति नहीं की। उनका चेहरा असली हिंदुत्व का है वे केवल हिंदुत्व ही नहीं बल्कि प्रखर हिंदुत्व का है। शिवसेना द्वारा बिहार में चुनाव में कदम रखने पर पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी हिंदी भाषी प्रदेशों में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। लोगों को शक्ति प्रदान करना चाहती है। ऐसे में अपने बल पर चुनाव लड़ने का निर्णय शिवसेना द्वारा लिया गया है।

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का विकास, गरीबी से लड़ना और भूमि पुत्रों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना उनका प्रमुख एजेंडा है। देश की आजादी में योगदान के चलते प्रदेश के साथ ही उनका भावनात्मक रिश्ता रहा है। इस दौरान पार्टी के प्रांतीय सम्मेलन को पार्टी केसचिव अनिल देसाई, उत्तर भारत के समन्वयक विनय शुक्ला, उत्तरप्रदेश और पंजाब के प्रांतीय अध्यक्ष आदि को संबोधित किया गया। 

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