ज़िंदा दिल शायरियां

दिया जरुर जलाऊंगा चाहे मुझे ईश्वर मिले न मिले,
हो सकता है दीपक की रोशनी से किसी मुसाफिर को ठोकर न लगे…

 

 

मैं रात भर जन्नत की सैर करता रहा यारों,
सुबह आँख खुली तो सर माँ के कदमों में था…

 

 

यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों से भी सर उठा के गुजर जाता हूँ…
बस, खौफ तो अपनों की गलियों से गुजरने में लगता है कि कोई धोखा ना दे दे.

 

 

चलने की कोशिश तो करो, दिशाए बहोत है,
.
रस्तो पे बिखरे काटो से ना डरो,
तुम्हारे साथ दूवाए बहोत है.

 

 

"सोचा था घर बनाकर बेठुंगा सुकून से,
पर घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना डाला..."

 

 

जो मेरे बूरे वक्त मे मेरे साथ हैं,
में उन्हें वादा करता हूँ…
मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिये होगा…

 

 

बुरा वक्त बताकर नहीं आता…
पर सीखाकर और समझाकर बहुत कुछ जाता है..!

 

 

किसी के पाँव से काँटा निकाल कर देखो..!!
तुम्हारे दिल की ‘चुभन’ जरूर कम होगी..!!

 

 

रोज़गार है तो सोमवार है,
वर्ना सातों दिन रविवार है…

 

 

जब तमन्ना जवान होती है,
ज़मीं भी आसमान होती है.

 

 

चलने दो जरा आँधियां हकीकत की….
न जाने कौन से झौंके में अपनों के मुखौटे उड़ जाएं…

 

 

मरने वाले को रोने वाले
हजार मिल जायेंगे मगर
.
जो जिंदा है उसे समझने
वाला एक भी नही मिलता.

 

 

पता है मैं हमेशा खुश क्यों रहता हूँ ?
क्योंकि मैं खुद के सिवा किसी से
कोई उम्मीद नहीं रखता...

Good Morning शायरी

हम तो ऐसे ही हसांते हैं भइया

खुबसुरती की मिसाल पेश करती जिंदा-दिल शायरियां

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -