'देख ली तेरी ईमानदारी ए दिल, तू मेरा और तुझे फ़िक्र किसी और की'

* गुरूर किस बात का साहब।
आज मिटटी के ऊपर कल मिट्टी के नीचे।

* हमने चेहरे पर मुस्कराहट रखकर।
आईने को अक्सर गुमराह रखा।

* देख ली तेरी ईमानदारी ए दिल।
तू मेरा और तुझे फ़िक्र किसी और की।

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