अष्टमी के दिन इस तरह करें महागौरी का पूजन, पूरी होगी सभी मनोकामनाएं

शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन 13 अक्टूबर बुधवार को है। नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की आराधना की जाती है। जो भक्त पूरी नवरात्रि व्रत नहीं रख पाते, वे अष्टमी के दिन उपवास रखकर माता महागौरी का पूजन करते हैं। महागौरी के पूजन के लिए प्रातः से ही मंदिरों में भीड़ लग जाती है। मां महागौरी को हलवा तथा पूड़ी बेहद पसंद है, इसलिए इस दिन अधिकांश घरोंं में हलवा-पूड़ी एवं काले चने प्रसाद के रूप में बनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त माता को नारियल का भोग भी लगाया जाता है। अगर आप भी नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक मातारानी के उपवास नहीं रख सके हैं तो अष्टमी के दिन माता की खास पूजा करके उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। जानिए पूजा विधि तथा महागौरी के पूजन का महत्व।

इस तरह करें पूजन:-
सबसे पहले पूजा की जगह को गंगाजल से पवित्र करें। भूमि पर चौक बनाकर फिर चौकी अथवा पाटा रखें। उस पर एक लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मातारानी की फोटो रखें। चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह भी रखें। इस दिन माता की फोटो के सामने ​मिट्टी के गौर अवश्य रखने चाहिए। मिट्टी के गौर को माता पार्वती का महागौरी स्वरूप माना जाता है। तत्पश्चात, गणपति का पूजन करें तथा मातारानी और महागौरी का प्रतीक गौर को सात बार सिंदूर अर्पित करें एवं सुहागिन महिलाएं इस सिंदूर को मां को अर्पित करने के पश्चात् अपनी मांग में भी लगाएं। इसके पश्चात् धूप, दीप, अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करें। आप चाहें तो सुहाग का सामान भी माता को अर्पित कर सकती हैं। तत्पश्चात, हलवा, चना और पूड़ी का प्रसाद अर्पित करें। फिर मां महागौरी की सप्तशती मंत्रों से आराधना करनी चाहिए। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

महागौरी के पूजन का महत्व:-
महागौरी का पूजन करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा पति को दीर्घायु मिलती है। वहीं कुंवारी कन्याओं को मनभावन पति मिलता है। कहा जाता है कि जो लोग माता महागौरी की विधि विधान से उपासना करते हैं, उनके घर में सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

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