कितनी बार बजाना चाहिए शंख और कहाँ रखना चाहिए, जानिए जरुरी नियम

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के पूजा-पाठ से जुड़े कई नियम होते हैं। जी हाँ और इसी लिस्ट में शामिल है शंख बजाना। जी दरअसल हिंदू धर्म के पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक उत्सव, अनुष्ठान, विवाह, राज्याभिषेक, गृह-प्रवेश जैसे कई शुभ कार्यों के दौरान शंख बजाना जरूरी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शंख को यश, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है। आपको शायद ही पता होगा लेकिन हिंदू के साथ ही जैन और बौद्ध धर्म में भी शंख बजाने का महत्य है। जी दरअसल हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में प्रतिदिन की पूजा में भी शंख बजाने का विधान है। कहा जाता है शंख की ध्वनि के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।, हालाँकि केवल शंख बजाने से ही पूजा संपन्न नहीं होती, बल्कि इसके कुछ नियम होते हैं, जिसका पालन करना जरूरी होता है। आज हम आपको उन्ही नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

शंख बजाने के जरूरी नियम-
* पूजा के मंदिर में दो शंख रखने चाहिए। जी दरअसल आपको एक शंख में जल भरकर रखना चाहिए और दूसरा शंख बजाने के लिए प्रयोग करना चाहिए।
* कहा जाता है शंख हमेशा ही सुबह और संध्या की पूजा में बजाना चाहिए और इसके अलावा किसी और पहर में शंख नहीं बजाना चाहिए।

* कहते हैं भगवान शिव की पूजा में शंख नहीं बजाना चाहिए और न ही इन्हें शंख में जल भरकर अभिषेक करना चाहिए।

* आपको बता दें कि शंख को रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसका खुला हुआ भाग ऊपर की ओर रखें।

* आपको बता दें कि पूजा में शंख को भगवान की प्रतिमा के दाईं ओर रखना चाहिए।

* शंख बजाने के बाद हमेशा ही शंख को धोकर रखना चाहिए, ध्यान रहे झूठा शंख कभी भी पूजा स्थान पर नहीं रखना चाहिए।

* ध्यान रहे पूजा करने से पहले तीन बार शंख जरूर बजाना चाहिए।

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