श्रीमद्भगवत गीता के नाम पर बरगला रहा इस्काॅन, विदेशों में भेज रहा कमाई

उज्जैन : सिंहस्थ वर्ष 2016 के दौरान द्वारकापीठ के शकंराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती मीडिया से खासे मुखातिब हो रहे हैं। कई बार उन्होंने श्री शिरडी सांई बाबा को लेकर चर्चा की। तो दूसरी ओर उन्होंने इस्काॅन अर्थात् अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ पर सवाल उठाए हैं। एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र में इस मसले को लेकर काफी जानकारी दी गई है। समाचार पत्र ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से चर्चा की।

जिसमें शंकराचार्य सरस्वती ने कहा कि इस्काॅन संस्था देश का धन इस्काॅन के माध्यम से विदेशों में भेज रही है। इसके लिए इस्काॅन के नाम का उपयोग हो रहा है। इस्काॅन के जो संत हैं उनमें अधिकांश पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। श्रीमद्भगवद् गीता पर टीका मुफ्त में बांटी जा रही है और फिर इससे धर्मांतरण हो रहा है।

उनका कहना था कि इस्काॅन शिव और विष्णु में अंतर कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस्काॅन ने जो मंदिर बेंगलुरू में तैयार करवाया है उसमें जो अर्थ प्राप्त होता है वह कोलगेट कंपनी द्वारा अर्जित किए गए धन के बराबर है। 

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