'मैं ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी स्वतंत्र हूँ', पढ़िए शहीद भगत सिंह के अनमोल विचार

हर साल मनाया जाने वाला शहीद दिवस आज यानी 23 मार्च को मनाया जाता है। आज ही के दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे महान क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं शहीद भगत सिंह के अनमोल विचार। 

1. मेरी गर्मी के कारण राख का एक एक कण चलायमान हैं मैं ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी स्वतंत्र हूँ।

2. क्रांति में सदैव संघर्ष हो यह जरुरी नहीं| यह बम और पिस्तौल की राह नहीं है।
3. जो व्यक्ति उन्नति के लिए राह में खड़ा होता है उसे परम्परागत चलन की आलोचना एवम विरोध करना होगा साथ ही उसे चुनौती देनी होगी।

4. मैं यह मानता हूँ की मह्त्वकांक्षी, आशावादी एवम जीवन के प्रति उत्साही हूँ लेकिन आवश्यकता अनुसार मैं इस सबका परित्याग कर सकता हूँ सही सच्चा त्याग होगा।

5. किसी भी कीमत पर शक्ति का प्रयोग ना करना काल्पनिक आदर्श है और देश में जो नवीन आन्दोलन शुरु हुआ है जिसके शुरुआत की हम चेतावनी दे चुके है वो गुरु गोबिन्द सिंह और शिवाजी, कमाल पाशा और राजा खान, वाशिंगटन और गैरीबालड़ी, लाफयेतटे और लेनिन के आदर्शों का अनुसरण है।

6. कोई भी व्यक्ति तब ही कुछ करता है जब वह अपने कार्य के परिणाम को लेकर आश्व्स्त (औचित्य) होता है जैसे हम असेम्बली में बम फेकने पर थे।

7. कठोरता एवं आजाद सोच ये दो क्रांतिकारी होने के गुण है।
8. मैं एक इन्सान हूँ और जो भी चीजे इंसानियत पर प्रभाव डालती है मुझे उनसे फर्क पड़ता है।

9. जीवन अपने दम पर चलता है.... दूसरों के कन्धों पर तो अंतिम यात्रा पूरी होती है।
10. प्रेमी, पागल और कवी एक ही थाली के चट्टे बट्टे होते है अर्थात सामान होते हैं।

11. यदि बहरों को सुनना है तो आवाज तेज करनी होगी . जब हमने बम फेका था तब हमारा इरादा किसी को जान से मारने नहीं था. हमने ब्रिटिश सरकार पर बम फेका था. ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ना होगा और उसे स्वतंत्र करना होगा।

12. किसी को “क्रांति” को परिभाषित नहीं करना चाहिए| इस शब्द के कई अर्थ एवं मतलब है की जो की इसका उपयोग अथवा दुरपयोग करने वाले तय करते है।

13. सामान्यत: लोग परिस्थिति के आदि हो जाते है और उनमें बदलाव करने की सोच मात्र से डर जाते है| अत: हमें इस भावना को क्रांति की भावना से बदलने की जरूरत है।

14. क्रांति मनुष्य का जन्म सिद्ध आधिकार है साथ ही आजादी भी जन्म सिद्ध अधिकार है और परिश्रम समाज का वास्तव में वहन करता है।

15. अहिंसा को आत्म विश्वास का बल प्राप्त है जिसमे जीत की आशा से कष्ट वहन किया जाता है। लेकिन अगर यह प्रयत्न विफल हो जाए तब क्या होगा? तब हमें इस आत्म शक्ति को शारीरिक शक्ति से जोड़ना होता है ताकि हम अत्याचारी दुश्मन की दया पर न रहे।

16. व्यक्तियों को कुचल कर, वे विचारों को नही मार सकते।
17. कानून की पवित्रता तभी बनी रह सकती है जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करें।

18. अगर हमें सरकार बनाने का मौका मिलेगा तो किसी के पास प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं मिलेगी।

19. क्या तुम्हें पता है कि दूनिया में सबसे बड़ा पाप गरीब होना है? गरीबी एक अभिशाप है यह एक सजा है.”

20. “राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान है, मैं एक ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी आजाद है।”

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