क्यों उम्र के साथ धीरे-धीरे मन सेक्स से दूर भागता है?

क्यों उम्र के साथ धीरे-धीरे मन सेक्स से दूर भागता है?

इंसान की जिंदगी में जिस तरह बाकि चीजों का स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है ठीक उसी तरह सेक्स भी इंसान के लिए काफी महत्वपूर्ण माना गया है. सेक्स न सिर्फ शारीरिक रूप से इंसान को खुश रखता है बल्कि मानसिक रूप से भी सेक्स इंसान के अच्छा ही होता है. सेक्स के लिए खास तौर पर अगर देखा जाए तो 50 की उम्र तक आते-आते पुरुष के भीतर सेक्स करने की क्षमताएं खत्म होने लगती है वहीं स्त्री घर परिवार के कामों में उलझ कर सेक्स से किनारा कर लेती है, यही कारण है कि किशोरवस्था से लेकर जवानी तक इंसान के भीतर खूब सारा सेक्स करने की इच्छाएं जाग्रत होती है. 

पुरुषों के भीतर एक बचपन की एक उम्र के बाद ‘प्रोस्टेट ग्रंथि’ बढ़ने लगती है. प्रोस्टेट ग्रंथि ही पुरुष के शरीर में सेक्स की इच्छाओं का एक मात्र कारण है. बचपन की उम्र के बाद जब हम किशोर अवस्था की ओर बढ़ने लगती है, हमारे शरीर के भीतर प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने लगती है, और सेक्स की इच्छाएं जागृत होती है वहीं शादी के बाद एक उम्र में पुरुषों पर मानसिक दबाव हावी हो जाता है, जिससे वो धीरे-धीरे सेक्स से दूर हो जाता है. 

साधारण तौर पर भारत में शादी की उम्र 25-30 होती है, यही वो उम्र है जब पुरुष अधिकतर शादी के बंधन में बंधते है लेकिन सेक्स की इच्छाएं पुरुष के शरीर में 16 से आने लगती है, इसका सीधा कारण आसपास का माहौल और दोस्ती यारी भी होती है. जिसके कारण अधिकतर पुरुष शादी से पहले ही सेक्स का आनंद ले चुके है.


 35 से पहले पुरुषो की वो उम्र होती है जब उनमें सेक्स करने की तीव्र इच्छाएं जागृत होती है वहीं इस उम्र के बाद शरीर में मौजूद प्रोस्टेट ग्रंथि मानसिक तनाव और जिम्मेदारियों के कारण घटने लगती है जिसके कारण सेक्स करने के लिए पुरुषों का शरीर साथ नहीं देता है और वो शारीरिक सुख की जगह मानसिक सुख को ज्यादा तवज्जों देता है. बस यही कुछ कारण है, जिसके चलते उम्र के बढ़ते पड़ाव में इंसान सेक्स से धीरे-धीरे दूर होता जाता है. 

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