उज्जैन महाकाल की नगरी में शिव के कई रूपों के होंगे दर्शन

Feb 13 2020 06:15 PM
उज्जैन महाकाल की नगरी में शिव के कई रूपों के होंगे दर्शन

उज्जैन: महाशिव नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी हैं. जिसमें भगवान महाकालेश्वर नाै दिन तक नए रूपाें में दर्शन देखने को मिलेंगे. पहले दिन गुरुवार को चंदन का श्रृंगार हुआ. वहीं शुक्रवार काे शेषनाग शृंगार किया जायेगा.  महाकालेश्वर मंदिर समिति ने 13 से 21 फरवरी तक के अलग-अगल रूपाें के शृंगार की व्यवस्था की जा चुकी है. जिसमें 11 में से केवल महाशिवरात्रि वाले दिन 21 फरवरी काे वस्त्र-आभूषण की बजाय जलधारा से शृंगार होगा.

वही वर्षभर में कुल 12 शिवरात्रियां होती हैं. उसमें फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि महाशिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है. संहार शक्ति व तमोगुण के अधिष्ठाता शिव की रात्रि महाशिवरात्रि शिव आराधना की सर्वश्रेष्ठ रात्रि है. इस बार शिवरात्रि पर त्रयोदशी के साथ चतुर्दशी का संयोग चारों प्रहर की पूजा को कुछ खास बना रहा है. वही इसी महारात्रि में जीवन रूपी चंद्र का शिव रूपी सूर्य से शामिल होगा. यदि बात करे महाशिवरात्रि के महत्व कि तो चतुर्दशी के स्वामी स्वयं शिव हैं. शिव नवरात्र के पहले दिन कोटेश्वर महादेव के पूजन के पश्चात् भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अभिषेक किया गया.शेषनाग का शृंगार कल,13 फरवरी को वस्त्र एवं चंदन,14 फरवरी को शेषनाग,15 फरवरी को घटाटाेप, 16 फरवरी को छबीना,17 फरवरी को हाेल्कर,18 फरवरी को मनमहेश

इस बार मंदिर समिति श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल काे रखने के लिए अलग से व्यवस्था करने जा रही हैं. जिसमें दर्शन करने जाते समय श्रद्धालु जूते-चप्पल हरसिद्धि के पास काउंटर पर रखने हाेंगे. यहां से उन्हें टाेकन मिलेगा. इसे लाैटते समय श्रद्धालुओं के अपने जूते-चप्पल शंख द्वार चाैराहे के पास बने काउंटर पर मिलेंगे. महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु महाकाल दर्शन के पश्चात् रुद्रसागर के बीच में से नए व कच्चे रास्ते से इंटरप्रिटिशीयन सेंटर के समीप राेड पर बाहर निकल सकेंगे. अधिकारियाें ने इस कच्चे रास्ते काे बनवाना शुरू करवा दिया है. इसकी आवश्यकता  इसलिए पड़ी क्याेंकि महाशिवरात्रि में ज्यादा दर्शनार्थी आएंगे.

 

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