सातवां वेतन आयोग बढ़ा सकता है सरकार का वेतन बोझ

सातवे वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर कवायदें तेज होती हुई देखने को मिल रही है. इसके तहत ही यह भी देखने को मिला है कि आयोग के द्वारा वेतन में बढ़ोतरी को लेकर सरकार को अच्छी रिपोर्ट सौपी गई है. लेकिन मामले में अब यह बात सामने आ रही है कि यदि केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन भत्तों में 23.55 फीसदी की बढ़ोतरी की जाने की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है तो ये सिफारिशें राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य को पूरा करने की राह में रोड़ा बन सकती है.

इस मामले में शोध करते हुए सामने आई फिच रेटिंग्स ने यह कहा है कि यदि सरकार के द्वारा कर्मचारियों की सिफारिशों को मान लिया जाता है तो इससे सरकार का वेतन का बोझ काफी हद तक बढ़ जाना है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार के द्वारा इन सिफारिशों को माने जाने के बाद 1 जनवरी 2016 से यह वेतनमान लागू कर दिया जाना है.

लेकिन साथ ही यह बात भी सामने आई है कि पिछले वेतन आयोग की तुलना में इस वेतन आयोग में सिफारिशें कम की गई है. गौरतलब है कि पहले 40 फीसदी की वृद्धि की सिफारिशें की गई थी और इसे 2008 में लागु किया गया था. इस मामले को आगे बढ़त हुए फिच ने यह भी कहा है कि इन सिफारिशों को लागू किये जाने के बाद सरकार का वेतन पर खर्च बढ़ जाना है और यह खर्च सकल घरेलू उत्पाद के 0.5 फीसदी के बराबर होने वाला है.

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