अलगाववादियों ने किया उपचुनाव का विरोध

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार ने पहले के रूख से यू-टर्न लेते हुए अलगाववादी हुर्रियत नेताओं को सैनिक काॅलोनी विरोधी सेमिनार की अनुमति दे दी है. अलगाववादी नेताओं को रिहा करते हुए महबूबा सरकार ने अलगाववादियों को सैनिक काॅलोनी विरोधी सेमिनार की अनुमति दे दी है. अलगाववादी नेता एसएएस गिलानी, मीरवाइज उमर फारूख को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नज़रबंद कर दिया. इस दौरान उन्हें दो सप्ताह की हिरासत के बाद नज़रबंदी से छोड़ दिया. उल्लेखनीय है कि यासीन मलिक को भी पकड़ लिया गया था।

सैनिक काॅलोनी के मसले पर आयोजित किए जाने वाले सेमिनार में पुलिस ने इस मामले में आवश्यक कदम उठाया. उल्लेखनीय है कि इस मसले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच विवाद भी हुआ था. जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को दो सप्ताह की पुलिस हिरसत के बाद उसे रिहा कर दिया गया. मलिक कुछ दूसरे अलगाववादियों के विरूद्ध चलने वाले 29 वर्ष पुराने मसले में टाडा अदालत में प्रस्तुत हुए थे।

मलिक को दो सप्ताह पूर्व पकड़ लिया गया. दरअसल कश्मीर घाटी में हुर्रियत नेता सैयद अली गिलानी और मीरवाईज उमर फारूक के नेतृत्व वाले संगठन समेत विभिन्न अलगाववादी राजनीतिक संगठनों के नेता आंदोलन करने में लगे हैं. दरअसल इन नेताओं ने अनंतनाग में होने वाले उपचुनाव का बहिष्कार करने की मांग की।

यह उपचुनाव 22 जून को होगा. अलगाववादी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने में लगे हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के कारण खाली हो गई थी. पूर्व मुख्यमंत्री सईद की बेटी महबूबा ही अनंतनाग से निर्वाचन लड़ रही हैं. उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों के 7 उम्मीदवार भी इस सीट से मैदान में हैं।

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