भारत में अफ्रीकी चीतों को बसाने की परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने भारत में अफ्रीकी चीतों को बसाने की परियोजना पर किसी प्रकार के रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कल यानि सोमवार को कहा कि वह अफ्रीकी चीतों को नामीबिया से भारत लाकर मध्यप्रदेश स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना के विरूध्द नहीं है। कोर्ट ने बताया कि बाघ-चीते के बीच टकराव के कोई सबूत रिकार्ड में नहीं हैं। जज एस ए बोबडे और जज बी आर गवई की पीठ ने पशुओं को अन्य जगहों पर बसाने के मामले में कोर्ट की मदद कर रहे अधिवक्ता से इस बारे में उनका नजरिया जानना चाहा।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से सीनियर वकील वसीम कादरी ने पीठ को सूचित किया कि अभयारण्य में बाघ और तेंदुए जैसे कई जानवर रहते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि उसे कैसे पता चलेगा कि चीता यहां के माहौल में जीवित रह सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की इस पहल से सहमति व्यक्त की और कहा कि वह अफ्रीकी चीतों को मध्य प्रदेश में बसाने का प्रयोग करने की नीति के खिलाफ नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करने का निश्चय किया।

इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही कादरी ने कहा कि न्याय-मित्र की यह टिप्पणी पूरी तरह गलत है कि यह जगह चीते के रहने की पसंदीदा क्षेत्र नहीं है। प्राधिकरण ने कहा कि चीतों को बसाने के लिये व्यावहारिक पाये गये सभी जगहों का फिर से आकलन किया जायेगा और इन्हें बसाने से पहले इनके लिये जरूरी उपायों के लिये कार्ययोजना तैयार की जायेगी। प्राधिकरण ने कहा कि मप्र सरकार ने नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में चीते फिर से बसाने के बारे में पत्र लिखा है। आपको बता दें की चिता भारत से पूरी तरह से गायब हो चुकी है।

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